फोटो-9-ग्राम चीतेपुर में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
गंजमुरादाबाद। ग्राम चीतेपुर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक महंत सुरेश दास ने कहा कि अहंकार ईश्वर का भोग है। जिस व्यक्ति ने अहंकार के वशीभूत होकर समाज के हित के विरुद्ध मार्ग चुना, वह पतन को प्राप्त हुआ। मनुष्य को अहंकार से दूर रहकर ईश्वर की भक्ति में मन रमाना चाहिए।
गोवर्धन पर्वत पूजन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को तोड़ने के लिए गोवर्धन की पूजा शुरू करा दी थी। इस पर इंद्र ने मूसलाधार वर्षा आरंभ कर दी। जिससे पूरा गोकुल डूबने लगा। तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी एक अंगुली पर उठाकर सभी गोकुलवासियों को उसकी छाया में सुरक्षित कर लिया। यह देख इंद्र लज्जित हुए और श्रीकृष्ण की शरण में पहुंच गए।