उन्नाव। केंद्र सरकार की योजना रूरल इकोनामिक वैल्यू एडेड मॉनीटरिंग प्रोग्राम (रीवैंप) का शहरी क्षेत्र में काम मार्च के तय समय के आठ माह बाद भी पूरा नहीं हो सका है। अभी भी नौ फीसदी काम शेष है। इस कारण कार्यदायी संस्था यूनिवर्सल प्राइवेट लिमिटेड पर 2.78 करोड़ जुर्माना लगा है। पावर कारपोरेशन ने संस्था के बिलों में जुर्माने की राशि की कटौती शुरू कर दी है।
बिजली विभाग ने वर्ष 2023 में सबसे अधिक लाइनलॉस वाले फीडरों का चिह्नांकन कराया था। इसमें शहर और ग्रामीण क्षेत्र के फीडर शामिल थे। शहर के मोतीनगर, छोटा चौराहा, पुलिस लाइन फीडरों में सबसे ज्यादा 25 से 30 प्रतिशत लाइनलॉस मिला था। इसके बाद रीवैंप योजना में शहरी क्षेत्र के लिए स्वीकृत 26.07 करोड़ से इन फीडरों को शामिल करके जनवरी 2024 में बिजली आपूर्ति में सुधार की तैयारी की गई थी।
सबसे पहले क्षतिग्रस्त व जर्जर पोल को हटाने और खंभों से तारों का मकड़जाल हटाने के लिए नई एबीसी केबिल बिछाई जानी थी। इसके लिए कार्यदायी संस्था को पहले चरण के कार्यों को पूरा करने के लिए 20 जनवरी 2025 का समय दिया गया था लेकिन संस्था तय समय पर काम पूरा नहीं कर पाई थी।
संस्था को मार्च तक का समय दिया गया था। यह समय भी बीत गया लेकिन संस्था काम पूरा नहीं कर सकी। तय समय के आठ माह होने वाले हैं लेकिन काम अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। इसको गंभीरता से लेते हुए पावर कारपोरेशन ने कार्य की लेटलतीफी पर संस्था पर 2.78 करोड़ करोड़ का जुर्माना लगा दिया। संस्था द्वारा प्रस्तुत किए गए बिलों में जुर्माने की धनराशि की कटौती शुरू कर दी गई है।
इंसेट-1
ठंड में भी उपभोक्ताओं को लग सकता है कटौती का करंट
संस्था को शहरी क्षेत्र में गर्मी से पहले कार्य पूरा करना था। इसका मकसद था कि शहरी लोगों को गर्मी में निर्बाध बिजली मिल सके लेकिन काम पूरा न होने से उपभोक्ता लोकल फाल्टों से घंटों आपूर्ति गुल रहने का दंश झेलते रहे। स्थिति यह है कि संस्था ने बारिश में भी शटडाउन लेकर काम कराया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि संस्था अभी तक 91 फीसदी यानी करीब 24 करोड़ के आसपास ही काम पूरे किए हैं। अभी भी नौ फीसदी काम शेष है। इसी कारण सर्दी में भी उपभोक्ताओं को कटौती झेलनी पड़ सकती है।
बॉक्स
अलग-अलग बिलों में हुई कटौती
पहली कटौती -79,35,917 रुपये
दूसरी कटौती -एक करोड़
तीसरी कटौती -1,63,421 रुपये
कुल कटौती-2.78 करोड़
वर्जन...
रीवैंप योजना का काम पूरा करने के लिए कार्यदायी संस्था ने दिसंबर 2025 तक का समय मांगा है। संस्था जितना लेटलतीफी करेगी, उतनी बिलों में कटौती की जाती रहेगी। अब तक 2.78 करोड़ जुर्माना लग चुका है। -योगेंद्र कुमार सिंह, अधीक्षण अभियंता।