उन्नाव। करीब सवा साल में बनकर तैयार हुए दोस्तीनगर बाईपास को मंगलवार से अनौपचारिक रूप से वाहनों के लिए खोल दिया गया। यातायात पुलिस ने अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय के पास से भारी वाहनों को डायवर्ट कर दोस्तीनगर बाईपास से निकाला। रोडवेज बसों और प्राइवेट वाहनों को ही डायवर्जन से छूट दी गई।
हरदोई मार्ग स्थित अग्निशमन प्रशिक्षण केंद्र से लखनऊ-कानपुर हाईवे स्थित दही चौकी तिराहा तक 9.5 किलोमीटर लंबे और सात मीटर चौड़े बाईपास मार्ग बनाने की घोषणा वर्ष 2016 में उन्नाव-शुक्लागंज फोरलेन मार्ग के लोकार्पण के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने की थी। प्रस्तावित बाईपास के क्षेत्र में वन विभाग की 7.5 हेक्टेयर जमीन का पेंच फंसने से लंबे समय तक मामला फाइलों में ही उलझा रहा। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद पीडब्ल्यूडी की ओर से बीघापुर में उपलब्ध कराई गई जमीन पर वन विभाग के सहमति जताने के बाद जुलाई 2024 में बाईपास निर्माण का कार्य शुरू हुआ था।
शासन से स्वीकृत 34 करोड़ के बजट से निर्माण तेजी से शुरू कराया गया था। 31 मार्च 2025 तक बाईपास शुरू करने की डेडलाइन रखी गई थी। पीडब्ल्यूडी ने करीब 80 फीसदी निर्माण कार्य पूरा होने का दावा किया था। इसी बीच सिंघूपुर के पास रेलवे क्रासिंग से आगे दो बीघे जमीन के काश्तकार दो किसानों ने कम मुआवजा को लेकर हाईकोर्ट में वाद दायर कर दिया था।
मामले के निस्तारण के बाद अब बाईपास निर्माण का कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। हालांकि पीडब्ल्यूडी बारिश रुकने के बाद औपचारिक शुभारंभ कराने की तैयारी में था लेकिन त्योहारों में शहर में होने वाली भीड़ को देखते हुए पुलिस ने आनन फानन अनौपचारिक रूप से मंगलवार से भारी वाहनों का रूट डायवर्जन कराकर दोस्तीनगर बाईपास की शुरुआत करा दी। अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय के पास यातायात पुलिस की तैनाती की गई। यहीं से पुलिस ने भारी वाहनों का रूट डायवर्ट कराकर बाईपास से निकलवाया।
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शहरियों को जाम से निजात की उम्मीद बढ़ी
अभी प्रतिदिन करीब पांच हजार वाहन अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय दोस्तीनगर के सामने से शहर के मोहल्ला दरोगाबाग, बाबूगंज पुल, मोतीनगर और आवास विकास कालोनी होते हुए लखनऊ कानपुर हाईवे आते-जाते हैं। शहर के अंदर से आवागमन होने के कारण अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। कई लोग दुर्घटनाओं में जान भी गवां चुके हैं। जाम भी लगता है। इसी समस्या को खत्म करने के लिए बाईपास निर्माण कराया गया है। भारी वाहनों के न आने से शहरवासियों को जाम से निजात मिलने की उम्मीद जगी है।
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दो रेलवे क्रासिंगों पर अंडरपास, ओवरब्रिज का पेंच फंसा
करीब 9.5 किमी लंबे बाईपास में दो रेलवे क्रासिंग हैं। इनमें एक उन्नाव-बालामऊ रूट पर सिंघूपुर व कानपुर-लखनऊ रेलमार्ग पर झंझरी क्रासिंग शामिल हैं। सिंघूपुर क्रासिंग तो 24 घंटे में तीन से चार बार ही बंद होती है लेकिन झंझरी क्रासिंग से हर आधे में ट्रेन निकलती हैं। मंगलवार को जो वाहन बाईपास से निकले, उनको झंझरी क्रासिंग खुलने के लिए काफी इंतजार करना पड़ा।
वर्जन...
दोस्तीनगर बाईपास का निर्माण पूरा हो चुका है। विभागीय स्तर पर बारिश थमने के बाद औपचारिक रूप से शुभारंभ कराने की तैयारी की गई थी। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने शहर में जाम की समस्या को खत्म करने और हरदोई पुल के जर्जर होने के कारण अनौपचारिक रूप से वाहनों को बाईपास से निकालने की बात कही थी। इसकी सहमति दे दी गई थी। इसी कारण पुलिस ने भारी वाहनों को डायवर्ट कराना शुरू कर दिया। -हरदयाल अहिरवार, एक्सईएन पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड।
त्योहारों में शहर में भीड़ को देखते हुए अक्सर जाम की समस्या रहती है। शहरवासियों को राहत देने के लिए दोस्तीनगर बाईपास से भारी वाहनों को डायवर्ट करके नए बने दोस्तीनगर बाईपास से निकालने की कार्रवाई शुरू की गई। सुबह से शाम तक सैकड़ों की संख्या में वाहन बिना किसी व्यवधान के बाईपास से निकल गए। इसलिए ट्रायल सफल रहा। रोडवेज व प्राइवेट बसों को छोड़कर अन्य भारी व माल वाहनों को बाईपास से ही निकाला जाएगा।
सुनील कुमार, प्रभारी यातायात।
फोटो-12-अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय के पास से भारी वाहनों को दोस्तीनगर बाईपास मार्ग की ओर - फोटो : मोतिगरपुर स्वास्थ्य केंद्र के बिजली बोर्ड के पास खुले तार।