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Unnao News: गवाही के कुछ दिन बाद फंदे से लटका मिला था रोशनी का शव

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असोहा (उन्नाव)। बुआ-भतीजी के हत्यारोपी को जिस चश्मदीद चचेरी बहन की अहम गवाही और साक्ष्य के अभाव में न्यायालय ने बरी किया है, उसका शव तीन महीने पहले सात जुलाई 2026 को घर में फंदे से मिला था। तब परिजनों ने उसे मानसिक रूप से परेशान बताया था। खुदकुशी से कुछ दिन पहले ही उसकी गवाही हुई थी।
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असोहा थाना क्षेत्र के बबुरहा गांव निवासी सूरज पाल ने 18 फरवरी 2021 को पुलिस को तहरीर दी थी कि बेटी काजल, चचेरी बहन रोशनी और भतीजी कोमल चारा लेने खेत गईं थीं। तीनों किशोरियां भाई सूर्यबली के खेत में बेसुध मिलीं। सीएचसी में कोमल और काजल को मृत घोषित कर दिया गया जबकि इलाज के बाद रोशनी की जान बच गई थी। पुलिस ने 20 फरवरी 2021 को पाठकपुर गांव के विनय उर्फ लंबू को हिरासत में लिया था। पुलिस का दावा था कि विनय ने एकतरफा प्रेम में रोशनी को जहरीला पानी पिलाकर मारने की साजिश रची लेकिन काजल और कोमल ने भी पानी पी लिया था, जिससे उनकी मौत हो गई।
अपर सत्र न्यायाधीश/एफटीसी प्रथम, महेंद्र कुमार सिंह की न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई पूरी हुई। इसमें अभियोजन पक्ष विनय पर लगाए गए आरोप साबित नहीं कर पाया। घटना की इकलौती चश्मदीद रोशनी ने भी क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान आरोपी विनय को घटना के समय घटनास्थल पर देखने से इन्कार कर दिया था। पुलिस आरोपी के मोबाइल और घटनास्थल पर मिली बोतल की बरामदगी से जुड़े साक्ष्य भी साबित नहीं कर सकी। न्यायालय ने आरोपी विनय उर्फ लंबू को बरी कर दिया।
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गवाही के कुछ दिन बाद सात जुलाई को रोशनी का शव घर में फंदे से लटका मिला था। हालांकि परिवार के लोगों ने किसी तरह का आरोप नहीं लगाया था। मां गंगाजली ने पुलिस को बताया था कि वह मवेशी चराने गई थी। अन्य परिजन भी घर में नहीं थे। यूपी 112 को सूचना देने पर पहुंची पीआरवी दरवाजे को तोड़कर रोशनी का शव निकाला था। परिजनों ने मानसिक परेशान होने की बात बताई थी लेकिन वजह क्या थी इसकी जानकारी से इन्कार किया था।

पिता बोले-बेटे को बेगुनाह साबित करने में लग गए पांच साल
उन्नाव। बुआ-भतीजी की हत्या के आरोप में करीब पांच साल जेल में बंद विनय उर्फ लंबू को न्यायालय ने सभी आरोपों से बरी कर दिया है। उसकी बेगुनाही साबित करने में पिता कृष्णपाल ने खेत, मवेशी और जेवर तक बेच दिए।
पिता कृष्णपाल ने कहा कि बेटा तो निर्दोष साबित हो गया लेकिन सब बिक गया। दो लोगों ने 10 लाख रुपये ऐंठ लिए। कहा कि बेटे विनय ने पांच कीमती साल जेल में बिताए, जिससे उसकी पढ़ाई और नौकरी का सपना टूट गया। पिता के अनुसार, पूछताछ में विनय को शारीरिक यातनाएं दी गईं। डर के कारण उसने वह अपराध कबूल कर लिया जो उसने नहीं किया था। परिवार को न्याय तो मिला पर वह आर्थिक रूप से बर्बाद हैं।
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