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Unnao News: फिर धंसी लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की 200 मीटर सड़क

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बीते 6 अगस्त से भारी वाहनों के लिए बंद एक्सप्रेसवे के कोरारी टोल प्लाजा के पास लगे कंक्रीट बोल् - फोटो : 1
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उन्नाव/असोहा। एक्सप्रेसवे की लखनऊ-कानपुर लेन पर बृहस्पतिवार की सुबह बेहटा गांव के पास सड़क धंस गई। इससे व्हील ट्रैक बन गए, जिससे यहां वाहन अनियंत्रित होने लगे। इस पर पीएनसी ने आनन-फानन 200 मीटर में डामर-गिट्टी डालकर ओवर-ले का काम शुरू कराया है। 25 जुलाई को भी इसी के पास कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन की 200 मीटर सड़क धंस गई थी। इसी के बाद एनएचएआई ने कई अधिकारियों पर कार्रवाई की थी।
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कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेस वे की लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर किलोमीटर संख्या 65.3 से 65.5 तक 200 मीटर सड़क धंसने लगी। वाहनों की आवाजाही से नाली (व्हील ट्रैक) बनने से तेज रफ्तार वाहन नालियों में पहुंचते ही लहराने लगे। इस पर निर्माण एजेंसी पीएनसी की तकनीकी टीम ने आनन-फानन मरम्मत शुरू की। ऊपरी परत को उखाड़ने और सफाई कराने के बाद नई ओवर-ले बिछाई गई।
मरम्मत का काम चलने से 100 किलोमीटर रफ्तार वाले दो ट्रैक बंद कर दिए गए हैं। केवल सड़क फुटपाथ की तरफ की भारी वाहनों वाली तीन नंबर लेन से वाहनों को निकाला जा रहा है। पीएनसी के इंजीनियर प्रवीन कुमार ने बताया कि सड़क मरम्मत का काम देर शाम को पूरा कर लिया गया है। जो भी छुटपुट काम बाकी हैं, उन्हें भी कराया जा रहा है।
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37 दिन बाद भी नहीं आई आईआईटी की जांच रिपोर्ट
उन्नाव से लखनऊ तक 43 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट 37 दिन बाद भी नहीं आई। 4200 करोड़ रुपये की लागत से बना यह एक्सप्रेसवे 25 जुलाई को लोकार्पण के 12 दिन बाद ही धंस गया।
एनएचएआई ने पांच अगस्त को पीडी सहित कई अधिकारियों को हटा दिया था। इसके बाद आईआईटी खड़गपुर की टीम ने गुणवत्ता की जांच शुरू की। टीम 25 दिनों तक जांच कर 30 अगस्त को लौट गई। 12 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने का दावा किया गया लेकिन 37 दिन बाद भी रिपोर्ट न आने से कई सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि बड़ी खामियों के कारण इसे दबाने के प्रयास हो रहे हैं। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट के बिना सुधार नहीं हो पा रहे। छह अगस्त से टोल वसूली पर लगी रोक 62 दिन बाद भी जारी है।

इनपर हो चुकी है कार्रवाई
एक्सप्रेसवे में खामियों के कारण एनएचएआई और निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक की काफी किरकिरी हुई। एनएचएआई ने पांच अगस्त को लखनऊ जोन के तत्कालीन पीडी नकुल प्रकाश वर्मा को हटा दिया था। पूर्व पीडी सौरभ चौरसिया के खिलाफ भी जांच शुरू कराई गई थी। निर्माण एजेंसी पीएनसी के तीन इंजीनियरों को एनएचएआई के कामों के लिए प्रतिबंधित भी किया गया था। इसके अतिरिक्त, 23 सितंबर को एनएचएआई के क्षेत्रीय प्रबंधक (आरओ) विशाल गौतम का तबादला जम्मू कर दिया गया था।

वर्जन...
आईआईटी की जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही खामियां सामने आएंगी और जो भी सुधार कार्य आवश्यक हैं वह भी कराए जा सकेंगे। सितंबर के आखिरी सप्ताह में रिपोर्ट आने और अक्तूबर में खामियों को दूर करके, भारी वाहनों के लिए भी खोलने और टोल शुल्क वसूली शुरू करने की योजना थी, हालांकि अभी कुछ और वक्त लगेगा। उच्चाधिकारियों को इस संबंध में अवगत कराया गया है। -नवरतन,पीडी एनएचएआई
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कब क्या हुआ
13 जुलाई को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का लोकार्पण।
25 जुलाई से एक्सप्रेसवे जगह-जगह धंसने लगा।
5 अगस्त को एनएचएआई ने पीडी सहित कई अधिकारियों को हटाया और आईआईटी खड़गपुर से जांच शुरू कराई।
6 अगस्त को एक्सप्रेसवे को भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया गया, साथ ही टोल शुल्क वसूली पर रोक लगा दी गई।
30 अगस्त को आईआईटी खड़गपुर की टीम जांच पूरी कर लौटी, रिपोर्ट 12 दिन में एनएचएआई को देने की बात कही।
37 दिन बाद भी आईआईटी की रिपोर्ट न मिलने से पूरी मरम्मत का काम शुरू नहीं
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