रेलवे ट्रैक को सुरक्षित करने की अधूरी दीवार। संवाद
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उन्नाव। ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने, ट्रैक के दोनों तरफ दीवार बनाकर ट्रेनों की सुरक्षा जैसी मिशन रफ्तार की परियोजनाएं हों या अमृत भारत स्टेशन परियोजना के तहत उन्नाव रेलवे स्टेशन के कायाकल्प। ये सभी परियोजनाएं वर्षों बाद भी अधूरी हैं। इससे ट्रेनों की रफ्तार नहीं बढ़ पा रही है।कानपुर से लखनऊ के बीच की दूरी तय करने में ट्रेनों को दोगुना से ज्यादा समय लग रहा है।
रेलवे की परियोजनाओं की सुस्ती की हालत यह है कि रेलवे अधिकारियों से लेकर सांसद तक कई बार काम को गति देने के निर्देश दिए और चेतावनी भी दी लेकिन निर्माण एजेंसी के जिम्मेदारों पर इसका असर नहीं पड़ा। ये महत्वपूर्ण परियोजनाएं अब तक अधूरी ही हैं। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। रेलवे स्टेशन पर निर्माण कार्य के चलते फैली सामग्री से यात्रियाें को परेशानी होती है। फुल स्पीड में ट्रेनों का संचालन न हो पाने से यात्रियों का समय बर्बाद होता है। आलम यह है कि कानपुर से लखनऊ की करीब 77 किलोमीटर की दूरी तय करने में ट्रेनों को दो घंटे से अधिक का समय लग रहा है, जबकि यही दूरी अन्य रूटों पर तय करने में ट्रेनों को 45 से 50 मिनट लगते हैं।
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