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Unnao News: बारिश से कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर चार जगह धंसी मिट्टी

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अचलगंज/असोहा (उन्नाव)। दो दिन से हो रही बारिश से बुधवार को कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की लखनऊ जाने वाली लेन पर तीन और लखनऊ से आने वाली लेन पर एक स्थान पर मिट्टी धंस गई। इसके अलावा दोनों लेन पर तीन जगह सड़क पर नाली (व्हील ट्रैक) बन गई। इसमें भरे पानी से वाहन चालक परेशान रहे।
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दो दिन से लगातार हो रही बारिश, कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की मरम्मत की पोल खोल रही है। हालत यह है कि एक जगह मरम्मत होती है तो दूसरी जगह सड़क के किनारे की मिट्टी कट जाती है। कानपुर से लखनऊ जाने वाली लेन पर किलोमीटर संख्या 59 से 59.3 कोरारी गांव के पास 300 मीटर में दो जगह करीब बीस-बीस मीटर दायरे में बनी नाली में बारिश का पानी भरने से वाहन चालक परेशान रहे। बचने के लिए वाहन चालक बार-बार लेन बदलते रहे। इससे पीछे चलने वाले वाहन चालकों को भी परेशानी हुई। किलोमीटर संख्या 55.4 और 56 के बीच अड़ेरुवा गांव के पास भी दो जगह सड़क पर पानी भरा दिखा।
लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर भी किलोमीटर संख्या 58.3 और कोरारी टोल से एक किमी पहले सड़क पर पानी भर गया था। किलोमीटर संख्या 64.5 कोरारी रेलवे पुल के अंडरपास के लखनऊ से कानपुर लेन पर सड़क और पुल के बीच करीब दो फीट सड़क दब गई। निर्माण एजेंसी पीएनसी के कर्मचारी मरम्मत कराते नजर आए। किमी संख्या 69.6 कानपुर से लखनऊ लेन पर करौंदी गांव के पास दबी सड़क पर भरा पानी परेशानी बना।
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आटा गांव के सामने लखनऊ से कानपुर लेन पर बारिश की वजह से बड़ा रेन कट हो गया। हालांकि निर्माण एजेंसी ने कंक्रीट भरकर मरम्मत की। किलोमीटर संख्या 39.3 सरैया गांव के पास और लखनऊ से कानपुर लेन पर किमी संख्या 45.3 रायपुर गांव के पास बड़े रेन कट बनने से तकनीकी टीमें जेसीबी से खोदाई कर मिट्टी हटातीं और डंपरों से कंक्रीट भरती रहीं।

ड्रेनेज सिस्टम फेल, लगातार 41वें दिन की गई मरम्मत
एक्सप्रेसवे पर 14 जुलाई को यातायात की शुरुआत हुई थी। इसके 12वें ही दिन कई जगह सड़क धंसने की समस्या हो गई थी। हालत यह है कि 25 जुलाई से शुरू हुआ मरम्मत का काम आज बुधवार को लगातार 41 वें दिन भी जारी है। सबसे ज्यादा समस्या, ड्रेनेज सिस्टम ठीक न होने से हो रही है।
ग्रीन फील्ड के 45 किमी हिस्से में कई जगह पर बारिश के पानी के बहाव के साथ फुटपाथ की मिट्टी दबने से आठ स्थानों पर कर्मचारी मशीनों से भराई और रोलर से दबाने के काम में लगे रहे। कर्मचारियों ने बताया कि जहां भी समस्या होती है फुटपाथ (कच्चे व कंक्रीट वाले स्थान) पर मिट्टी और कंक्रीट डालकर कुटाई की जा रही है। किनारे, स्लोप की मिट्टी को भी मजबूत किया जा रहा है। कर्मचारियों ने बताया कि कंट्रोल रूम से पूरे एक्सप्रेसवे की निगरानी की जा रही है। जैसे ही कोई समस्या होती है, फोन करके बताया जाता है और मशीनें और सामग्री लेकर पहुंचते और मरम्मत करते हैं।
वर्जन...
कोई भी एक्सप्रेसवे हो, पहली बारिश में इस तरह की समस्याएं आती हैं। पूरे एक्सप्रेसवे की कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है। जहां पर थोड़ी भी समस्या नजर आती है। फील्ड में काम कर रहीं 10 मोबाइल टीमों को मैसेज देकर अधिकतम एक घंटे में मरम्मत करा दी जाती है। यह प्रक्रिया दिन-रात चल रही है। एक्सप्रेसवे के रखरखाव की जिम्मेदारी अगले 15 साल तक की है, जहां पर जो भी समस्या होगी उसे तत्काल ठीक कराया जाएगा। -विजय एस कुंडू, मैनेजर पीएनसी।
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