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Unnao News: एक्सप्रेसवे की धंसी मिट्टी, हवा में लटकी 10 मीटर सड़क

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फोटो-20- कानपुर-लखनऊ लेन पर बंदूखेड़ा के सामने मिट्टी धंसने से हवा में लटकी सड़क। संवाद
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नवाबगंज/अचलगंज (उन्नाव)। यातायात के लिए खोले जाने के 12वें दिन से जगह-जगह धंसना शुरू हुआ कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे निर्माण में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोल रहा है। हल्की बारिश में ही रोज कहीं सड़क धंस रही है तो कहीं मिट्टी बह जा रही है। शुक्रवार रात कानपुर-लखनऊ लेन पर बंदूखेड़ा के सामने 10 मीटर दायरे मिट्टी बैठ गई। इससे सड़क सात मीटर गहराई में हवा में टंग गई।
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हादसे का खतरा देख पीएनसी की टीम आनन-फानन पहुंची और मिट्टी-गिट्टी भरने का काम शुरू किया। लखनऊ की तरफ बेगमखेड़ा के पास चिरैया नाला अंडरपास की साइड वॉल दरक गई। इसे भी दोबारा बनाया जा रहा है। उन्नाव-लालगंज हाईवे अंडरपास के पास 10 मीटर सड़क दबने से मरम्मत कराई गई। वहीं भगवतपुर गांव के पास रात में 500 मीटर सड़क का पैचवर्क किया गया।



हालत यह है कि एनएचएआई जिस एक्सप्रेसवे पर 4200 करोड़ रुपये खर्च करने का दावा कर रहा है, उसकी हालत अब तक ग्रामीण सड़क से भी बदतर साबित हुई है। रोज कई जगह सड़क धंस रही है, दरारें और गड्ढे हो रहे हैं। शनिवार को कानपुर से लखनऊ लेन पर किलोमीटर संख्या 69.8 पर बंदूखेड़ा गांव के सामने बारिश का पानी भरने से 10 मीटर लंबी और करीब आठ मीटर गहराई में मिट्टी धंस गई। इससे सड़क का कुछ हिस्सा हवा में लटक गया। निर्माण एजेंसी पीएनसी ने आनन-फानन ट्रैफिक डायवर्जन करके गिट्टी-मिट्टी की भरान शुरू की। करीब दो घंटे बाद गड्ढे को भरा जा सका। वहीं लखनऊ-कानपुर लेन पर बेगमखेड़ा गांव के पास किलोमीटर संख्या 30.1 के पास चिरैया नाला के लिए बने अंडरपास की साइड वॉल में दरार होने पर उसे भी तोड़कर मरम्मत शुरू कराई गई है।
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कोरारी टोल प्लाजा की तरफ कानपुर-लखनऊ लेन पर किलोमीटर संख्या 65 पर बने उन्नाव-लालगंज हाईवे के अंडरपास के पास करीब 10 मीटर सड़क में नाली (व्हील ट्रैक) बनने से वाहन अनियंत्रित होने लगे। समस्या सामने आने पर निर्माण एजेंसी ने आनन-फानन मरम्मत कराई। इससे पहले शुक्रवार रात कानपुर-लखनऊ लेन पर ही किलोमीटर संख्या 67 से 68 के बीच भगवतपुर गांव के सामने पांच सौ मीटर सड़क दबने पर रातों-रात मरम्मत करके खामी पर पर्दा डाला गया।



आईआईटी खड़गपुर की जांच रिपोर्ट दबाने की चर्चा



एनएचएआई का दावा है कि यह एक्सप्रेसवे एआईएमसी तकनीक से बनाया गया है। इस तकनीक में सड़क में उपयोग होने वाली सामग्रियों में जैसे डामर कंक्रीट की गुणवत्ता की एआई मशीनों से जांच की जाती है। यह तकनीक सड़क में मिश्रण, बिछाने की प्रक्रिया, उसकी संरचना, तापमान, नमी व अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों की निगरानी करके निर्माण पूरा किया जाता है। हालांकि लगातार लगातार तीस दिनों से धंस रही सड़क और पैचवर्क करके लगाए जा रहे पैबंद निर्माण में लापरवाही उजागर कर रहे हैं। हालांकि आईआईटी खड़गपुर की टीम की जांच रिपोर्ट से सबकुछ स्पष्ट हो जाने के दावे किए जा रहे थे लेकिन करीब टीम के लौटने करीब 15 दिन बाद भी रिपोर्ट का सामने न आना भी सवालों के घेरे में है। अंदरखाने चर्चा है कि आईआईटी और हैदराबाद की आईआरएमएस की जांच रिपोर्ट आ गई है, लेकिन एनएचएआई के अफसर उसे दबाए हैं।



वर्जन...



पिछले दिनों हुई बारिश की वजह से कुछ स्थानों पर मिट्टी बह जाने और दबने की समस्या हुई थी। अब सूखने पर और दब रही है। बंदूखेड़ा गांव के सामने मिट्टी दबी थी वहां पर भरान कराया गया है। वहीं चिरैया नाला की साइड वॉल में कोई क्रैक नहीं आया था उसकी ऊंचाई बढ़ाने का कराया जा रहा है। अन्य स्थानों पर जहां भी छोटी-मोटी समस्या सामने आई उसे ठीक करा दिया गया है। जब तक मामूली कमी भी सामने आती रही मरम्मत कराई जाती रहेगी। एक्सप्रेसवे का यातायात सामान्य है। आईआईटी की जांच रिपोर्ट अभी नहीं आई है, जैसे ही आएगी बताया जाएगा।-सत्य नारायण मैनेजर पीएनसी।
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