अचलगंज/असोहा। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे की सड़क धंसने का सिलसिला जारी है। ट्रैफिक डायवर्जन कर रोज औसतन 1000 मीटर पैचवर्क कराया जा रहा है। बुधवार को चार और स्थानों पर सड़क धंस गई, जिसकी मरम्मत कराई जा रही है। छह स्थानों पर सड़क पटरी और किनारे की मिट्टी धंसने से सड़क को नुकसान का खतरा है।
4200 करोड़ की लागत वाले जिस कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे को अत्याधुनिक एआईएमसी तकनीक से बनाने के दावे किए गए थे, वह यातायात चालू होने के 12वें दिन से ही धंसने लगा। हालत यह है कि 26 दिन से लगातार जगह-जगह एक्सप्रेस की मरम्मत जारी है। बुधवार को लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर किलोमीटर संख्या 68.8 करौंदी के पास करीब 30 मीटर सड़क धंस गई। निर्माण एजेंसी पीएनसी ने मरम्मत शुरू कराई है।
कानपुर-लखनऊ लेन पर कोरारी टोल गेट के पास पांच दिन पहले 30 मीटर में भारी वाहन वाली लेन की मरम्मत कराई गई थी। यहां दूसरी लेन धंस गई है। किलोमीटर संख्या 65.3 से 65.4 के बीच करीब पचास मीटर में ओवरटेक लेन धंसी है। किमी संख्या 62.7 से 62.8 के बीच तीस मीटर सड़क दब गई है। वहीं किलोमीटर संख्या 69.9 आटा और किलोमीटर संख्या 54.8 पर मोहद्दीनपुर गांव के सामने भी सड़क में नाली (व्हील ट्रैक) की समस्या आने से वाहन चालकों की समस्या बढ़ गई है।
चार दिन पहले कोरारी रेलवे स्टेशन के अंडरपास के स्लैब ज्वाइंट में आई दरार लगातार बढ़ने के बाद निर्माण एजेंसी ने बुधवार को मरम्मत शुरू की है। यहां कंक्रीट को उखाड़ कर नए सिरे से सीमेंट और कंक्रीट भरी जा रही है। सोमवार और मंगलवार को हुई बारिश का पानी जाने से सड़क पटरी जगह-जगह बैठने लगी है। कई जगह तो पानी नाली से न निकलने के कारण बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं, इससे सेफ्टी ग्रिल हिल रही और सड़क को नुकसान शुरू हो गया है। इनमें लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर किलोमीटर संख्या 70.7 से 70.8 के बीच करीब सौ मीटर व अन्य स्थानों पर पटरी धंसी है।
रात में भी कराई जा रही मरम्मत
बारिश की वजह से होने वाली रुकावट और पैचवर्क मजबूत होने से पहले ही बारिश होने से यह टिकाऊ साबित नहीं हो रहे हैं। इसके लिए निर्माण एजेंसी ने अब एक्सप्रेसवे की दिन-रात मरम्मत शुरू की है। मंगलवार रात को कानपुर-लखनऊ लेन पर जगेथा गांव के पास किलोमीटर मीटर संख्या 49 से 49.3, बेहटा के पास किमी संख्या 64.3 से 64.7 तक, तूरी गांव के सामने किमी संख्या 47.6 से 47.9 तक और लखनऊ से कानपुर लेन पर किमी संख्या 62.1 से 62.2 तक सड़क की दो लेन को उखाड़ कर दोबारा बनाया गया है।
सड़क पटरी में जगह-जगह गड्ढे, धंसी सेफ्टी ग्रिल
अचलगंज। नालियों की सफाई और मरम्मत के बाद भी एक्सप्रेसवे पर सड़क के किनारे की मिट्टी बहने और दबने से दर्जनों स्थानों पर सेफ्टी ग्रिल भी दब गई है। एक्सप्रेसवे के आसपास चर रहे जानवर अक्सर सड़क पर पहुंच जाते हैं और वाहन चालकों के लिए खतरा बनते हैं। हैरानी की बात यह है कि पेट्रोलिंग टीमों के लगातार निरीक्षण और गश्त के दावों के साथ ही कंट्रोल रूम में लगे कैमरों से निगरानी के दावों के बाद भी छुट्टा मवेशी घंटों एक्सप्रेसवे पर टहलते और मुसाफिरों के लिए खतरा बने रहते हैं। आजाद मार्ग से लखनऊ के बनी तक 45 किलोमीटर ग्रीन फील्ड एरिया में दर्जनों स्थानों पर फेंसिंग टूटी है। इससे जानवर सड़क तक आ जाते हैं।
40 मिनट में सफर पूरा होने का दावा फेल
लोकार्पण के समय एनएचएआई ने दावा किया था कि इस एक्सप्रेसवे पर चार पहिया वाहन को 120 किलोमीटर तक की रफ्तार से चलाकर कानपुर से लखनऊ के तीन घंटे को सफर को सिर्फ 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। लेकिन 14 जुलाई को यातायात शुरू होने के साथ ही घटिया निर्माण की पोल खुलने लगी। उन्नाव से कानपुर के बीच अब तक कानपुर लेन पर 80 फीसदी हिस्से में पैचवर्क करना पड़ा है वहीं लखनऊ से कानपुर लेन पर भी करीब एक सप्ताह से खामियां होने लगी हैं। इस लेन पर अब तक करीब बीस फीसदी हिस्से में मरम्मत करानी पड़ी है।
हर पुल और अंडरपास पर झटका
एक्सप्रेसवे में तीन इंटरचेंज के अलावा दो फ्लाईओवर, एक रोड ओवरब्रिज और चार बड़े पुल हैं। इसके अलावा 25 लघु पुल, 12 वाहन अंडरपास और 14 हल्के वाहन अंडरपास हैं और हर पुल-पुलिया पर वाहन झटके खा रहे हैं।
फोटो-32-करौंदी गांव के पास सड़क की मरम्मत करते कर्मचारी। संवाद