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Unnao News: ईरान और अमेरिका-इस्राइल युद्ध से चार हजार करोड़ का आयात-निर्यात प्रभावित

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फोटो-11 ताज आलम
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उन्नाव। यूक्रेन-रूस युद्ध और अमेरिकी टैरिफ के कारण पहले से ही लड़खड़ाए चर्म उत्पाद निर्यात व्यापार को बड़ा झटका लगा है। ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच चल रहे युद्ध ने और प्रभावित किया है। उद्यमियों का कहना है कि हवाई और समुद्री मार्ग बाधित होने से अब तक करीब चार हजार करोड़ रुपये का आयात-निर्यात प्रभावित हुआ है। विदेशी कंपनियों ने पहले से बुक किए गए ऑर्डर फिलहाल रोक दिए हैं।
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अमेरिका के 50 फीसदी टैरिफ के बाद जिले के उद्यमियों को यूरोपीय यूनियन से व्यापार समझौते से उम्मीद थी। बाद में अमेरिका के टैरिफ घटाने से निर्यात बढ़ने की संभावना दिखी थी लेकिन इस्राइल-अमेरिका के ईरान पर हमले ने सभी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। आईआईए के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जीसी मिश्रा और पूर्व अध्यक्ष मोहन बंसल ने बताया कि 18 दिन के युद्ध ने निर्यात और आयात व्यापार को लगभग छह महीने पीछे कर दिया है।
यूरोपीय देशों में ज्यादातर निर्यात पानी के जहाजों से होता है। सीधा समुद्री मार्ग बाधित होने के कारण दूसरे रास्तों से माल भेजने में अधिक समय और किराया लग रहा है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में विदेशों में निर्यात और वहां से कच्चे माल का आयात और भी प्रभावित होगा। इससे व्यापार को और नुकसान होगा।
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फोटो-11 ताज आलम
माल भेजने में ज्यादा लग रहा समय और किराया
ईरान और अमेरिका-इस्राइल युद्ध से माल की सप्लाई प्रभावित हुई है। इससे करीब दो हजार करोड़ का चर्म निर्यात प्रभावित है। तैयार माल लंबे रास्तों से भेजने में समय और किराया भी ज्यादा लग रहा है। विदेशों में मांग घटी है और बाजार को पटरी पर आने में छह महीने से एक साल का वक्त लग सकता है। -ताज आलम, अध्यक्ष चमड़ा उद्योग संघ उन्नाव चैप्टर।




फोटो-12-अरुण कुमार माहेश्वरी।
निर्यात व्यापार हो रहा प्रभावित
निर्यात व्यापार में लगातार उतार-चढ़ाव बना है। जैसे ही कोई नई उम्मीद नजर आती है, दुनिया के अलग-अलग देशों में कुछ ऐसा हो जाता है कि व्यापार प्रभावित हो जाता है। ईरान और अमेरिका-इस्राइल के बीच युद्ध से पूरा खाड़ी क्षेत्र प्रभावित हो गया है। जिले के चमड़ा, मांस, कपड़ा सहित दूसरे उत्पादों का निर्यात व्यापार प्रभावित है।- अरुण कुमार माहेश्वरी, अध्यक्ष आईआईए।

फोटो-13-असद कमाल इराकी
युद्ध से चमड़े की टैनिंग (खाल से चमड़ा बनाने) में उपयोग होने वाला फार्मिक एसिड 60 रुपये से बढ़कर 80 रुपये किलो, सोडियम फार्मेट 37 रुपये से बढ़कर 50 रुपये किलो हो गया है। अन्य केमिकल का यही हाल है। शिपिंग चार्ज दोगुना से ज्यादा है। जो कंटेनर 1100 से 1200 डॉलर में यूरोपीय देशों में पहुंचता था। अब 3500 डालर किराया देना पड़ रहा है। -असद कमाल इराकी, पूर्व अध्यक्ष चर्म निर्यात परिषद।

फोटो-11 ताज आलम

फोटो-11 ताज आलम

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