पुरवा। यहां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को कहने को तो सीएचसी का दर्जा है लेकिन मरीजों को जांच और इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। अल्ट्रासाउंड मशीन और पर्याप्त चिकित्सकों की तैनाती नहीं है। इससे मरीजों को निजी नर्सिंगहोम या जनपद मुख्यालय जाना पड़ता है।
वर्ष 1991 में इसे सीएचसी का दर्जा मिला था। वर्तमान में इससे करीब 1.67 लाख की आबादी जुड़ी है। यहां बाल रोग विशेषज्ञ न होने से बच्चों का इलाज नहीं हो पाता है। प्रसव कराने की जिम्मेदारी पुरुष डॉक्टर आदर्श सचान पर है। महिलाओं की ओपीडी आयुष डॉक्टर रजनी अवस्थी देखती हैं। जनरल सर्जन डॉक्टर आशुतोष शुक्ला का नवंबर 2023 में स्थानांतरण हो गया था। हड्डी रोग विशेषज्ञ और चेस्ट रोग विशेषज्ञ भी कई वर्षों से नहीं हैं।
सीएचसी में नवजात शिशु देखभाल इकाई (एनबीएसयू) बनी है। हालांकि यहां केवल एक स्टाफ नर्स निधू वर्मा तैनात हैं जबकि तीन स्टाफ नर्स की जरूरत है। सीएचसी प्रभारी डॉक्टर प्रमोद कुमार ने बताया कि बाल, हड्डी, चेस्ट रोग विशेषज्ञों और जनरल सर्जन की कमी है। इसके लिए चार बार पत्राचार किया जा चुका है।