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Unnao News: हाईवे पर जाम से निपटने के नहीं पर्याप्त इंतजाम

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फोटो-4-कानपुर-लखनऊ हाईवे पर लगा जाम। आर्काइव - फोटो : नैमिषारण्य में कथा कहते इंद्रेश महाराज।
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उन्नाव। लखनऊ-कानपुर हाईवे पर खनिज लदे भारी वाहनों के अत्यधिक आवागमन से आए दिन हादसे होते हैं। इसके बावजूद एनएचएआई और यातायात पुलिस के पास वाहनों को हटाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। बुधवार को एक के बाद एक हुए तीन हादसों से 10 घंटे तक यातायात बाधित रहा। टोल एजेंसी के पास केवल एक हाइड्रा है जिसकी क्षमता मात्र 14 टन है।
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बुधवार सुबह करीब चार बजे दही चौकी के पास मौरंग लदा डंपर क्षतिग्रस्त होकर सड़क पर फंस गया था। करीब 60 टन माल लदे डंपर को टोल प्लाजा की 14 टन क्षमता वाली क्रेन हटाने विफल रही। यातायात पुलिस ने किसी तरह तीन और हाईड्रा की व्यवस्था की जिसमें एक घंटे का समय लगा। चारों हाइड्रा मशीनों को समानांतर लगाने का स्थान न होने से डंपर को हटाना मुश्किल हुआ। अंततः मौरंग खाली कराने के बाद ही डंपर को सड़क से हटाया जा सका। इस घटना ने सड़क सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी।

पर्याप्त नहीं है यातायात पुलिस
हाईवे पर जाम लगने से हल्के वाहनों का आवागमन शहर के अंदर से होने लगा। इससे शहर की यातायात व्यवस्था भी चरमरा गई। यातायात संचालन के लिए पर्याप्त पुलिस कर्मियों की कमी बड़ी समस्या है। सिटी सर्किल में 20 ट्रैफिक पॉइंट हैं जहां यातायात पुलिस, होमगार्ड और पीआरडी कर्मचारी तैनात हैं। जिले में एक यातायात निरीक्षक, 18 उपनिरीक्षक और 75 सिपाही उपलब्ध हैं। इसके अलावा 41 होमगार्ड और 58 पीआरडी कर्मचारी दो शिफ्ट की ड्यूटी के लिए हैं।
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क्रिटिकल कॉरिडोर टीमें भी बेअसर

वर्तमान में दो उपनिरीक्षक वर्ष 2024 से अयोध्या में ड्यूटी पर हैं। 10 सिपाही सीतापुर मिश्रिख मेला में तैनात किए गए हैं। विधानसभा सत्र के लिए एक दरोगा और नौ सिपाही लखनऊ में लगाए गए हैं। उन्नाव प्रदेश के 20 दुर्घटना बाहुल्य जिलों में शामिल है। यहां ‘जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट’ अभियान के तहत लगभग नवंबर 2025 में 14 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों की तैनाती हुई थी। इन टीमों का उद्देश्य दुर्घटना स्थलों पर तात्कालिक कदम उठाना और हादसों का निदान करना था, पर वे बेअसर साबित हुईं।



पूर्व मुख्यमंत्री ने भी उठाए सवाल

पिछले शुक्रवार को कानपुर जाते समय पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी जाम में फंस गए थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस व्यवस्था को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि एक्सप्रेसवे से लखनऊ से कानपुर 45 मिनट में पहुंचने का दावा किया जाता है लेकिन इसके आगे लगने वाले 90 मिनट के जाम का क्या।

बोले जिम्मेदार

टोल प्लाजा एजेंसी के पास 14 टन क्षमता का हाइड्रा है और वाहनों में फंसे घायलों को निकालने के लिए दो क्रेनें हैं। हाईड्रा और एक क्रेन टोल बैरियर पर रहती है जबकि एक एंबुलेंस दुर्घटना बाहुल्य आजाद मार्ग चौराहा के पास तैनात रहती है। जाजमऊ से बनी तक के लिए पेट्रोलिंग वाहन है। टोल वसूली करने वाली एजेंसी से अत्यधिक भारी वाहनों को तत्काल हाईवे से हटाने और यातायात बहाल करने के लिए और संसाधन सुनिश्चित कराए जाएंगे। -संजय सिंह, पेट्रोलिंग इंचार्ज एनएचएआई।




एक के बाद एक, तीन भारी वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण समस्या हुई थी। एक वाहन को हटवाने के बाद जैसे ही यातायात सामान्य होने के था और हादसा हो गया। वहीं यातायात संचालन के लिए सभी चौराहों, तिराहों और हाईवे के प्वाइंटों पर यातायात पुलिस, होमगार्ड और पीआरडी जवान तैनात रहते हैं। दूसरे जिलों में ड्यूटी पर भेजे गए यातायात पुलिस कर्मी वापस आने वाले हैं। -सुनील सिंह यातायात प्रभारी
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टोल कंपनियों की प्रमुख जिम्मेदारी

-हाईवे पर किसी भी वाहन के खराब होने पर उसे तुरंत सड़क से हटाना।

-कोई भी हादसा होने पर तत्काल एंबुलेंस और हाइड्रा और क्रेन मौके पर पहुंचाना।
-घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाना और वाहनों को हटाना।

-हाईवे और एक्सप्रेसवे की पेट्रोलिंग करके वाहनों को खड़े होने से रोकना।

-एंबुलेंस में प्रशिक्षित मेडिकल टीम, ताकि घायलों को तात्कालिक उपचार हो सके।
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