उन्नाव। शहरवासियों को शुद्ध पेयजल देने के लिए 264 करोड़ की अटल मिशन आफ रेजूवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजना पांच साल बाद भी शहर के हर घर तक पानी नहीं पहुंचा पाई। योजना में आए दिन भ्रष्टाचार के फव्वारे फूट रहे हैं। टेस्टिंग में दो महीने में ही 18 जगह लीकेज मिले। जल निगम का दावा है कि 10 में सात जोन की टेस्टिंग पूरी हो गई है। उधर, पाइप लाइनों में लीकेज का हवाला देकर नगर पालिका ने हस्तांतरण की फाइल लौटा दी है। डीएम ने जांच टीम बनाकर सर्वे और सुधार के निर्देश दिए हैं।
शहर के सभी 32 वार्डों के 30,298 घरों तक नल से जल पहुंचाने के लिए वर्ष 2018 में 264 करोड़ की योजना मंजूर हुई थी। गंगा नदी के पानी को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में साफ करके हर घर तक जलापूर्ति करनी है। योजना को 2020 तक पूरा करना था लेकिन पहले कोविड फिर बजट की वजह से बार-बार समय सीमा बढ़ती रही। अब जल निगम का दावा है कि 10 में से सात जोन की टेस्टिंग पूरी हो गई है और तीन में अंतिम चरण का काम चल रहा है। जल निगम ने योजना के हस्तांतरण के लिए नगर पालिका को फाइल भी भेजी लेकिन पाइपलाइन आए दिन फूटने और लीकेज की समस्या को देखते हुए पालिका ने पूरी तरह से सुधार होने तक जिम्मेदारी लेने से इन्कार कर दिया। वहीं डीएम गौरांग राठी ने निकाय प्रभारी एडीएम अमिताभ यादव को जल निगम की ओर से पूरे बताए जा रहे जोनों का दोबारा सर्वे कर उसमें सुधार कराने का निर्देश दिया है।
नगर पालिका का दावा नियमित जलापूर्ति नहीं
नगर पालिका का दावा है कि शहर के किसी भी जोन में नियमित जलापूर्ति नहीं हो रही है। जिन जोन में काम पूरा हो गया है वहां भी टेस्टिंग में तमाम जगह लीकेज हो रहे हैं। नगर पालिका अपनी पुरानी व्यवस्था के तहत 24 ट्यूबवेलों के माध्यम से ही जलापूर्ति कर रहा है। पेयजल की किल्लत न हो इसके लिए ट्यूबवेलों के स्पेयर पार्ट्स पर 24.96 लाख, जलापूर्ति पाइप लाइनों की मरम्मत पर 45 लाख, सभी 32 वार्डों व सार्वजनिक स्थानों सहित 50 मिनी टंकी व सबमर्सिबल लगाने पर 50 लाख रुपये, ट्यूबवेल में क्लोरीन डोजर लगाने पर 7.50 लाख खर्च किए हैं। अगर अमृत योजना से नियमित जलापूर्ति हो रही होती तो उसे यह बजट खर्च न करना पड़ता।
निर्माण एजेंसी पर 12.40 करोड़ जुर्माना भी लगा
योजना में लगातार देरी और गड़बड़ी पर जल निगम ने निर्माण एजेंसी पर तीन बार जुर्माना लगाया। सितंबर 2024 में लेटलतीफी पर 5.90 करोड़ रुपये जुर्माना लगा। खोदी गई सड़कों की मरम्मत न कराने व जिला प्रशासन को गलत रिपोर्ट देने पर जून 2023 में एक करोड़ रुपये और फिर लेटलतीफी को लेकर 21 नवंबर 2023 को 5.50 करोड़ रुपये जुर्माना लगा था। इसके बाद भी लापरवाही जारी है।
15 दिन बंद रही सिविल लाइंस क्षेत्र में टेस्टिंग
दिसंबर में सिविल लाइंस क्षेत्र की टेस्टिंग 15 दिन बंद रही। जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि गंगा नदी में पानी कम होने से बैराज के पास बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को पर्याप्त पानी न मिलने के कारण ऐसा हुआ। हालांकि प्लांट के मोटर पंप को नीचे करने के बाद अब पर्याप्त पानी मिलने का दावा किया जा रहा है।
बोले जिम्मेदार
भूमिगत पाइप लाइनों में अक्सर कहीं न कहीं लीकेज होता रहता है। टेस्टिंग पूरी होने और कुछ महीने तक योजना के सुचारू रूप से चलने के बाद ही नगर पालिका इसे हैंडओवर लेगी। योजना के संचालन पर कर्मचारियों, संसाधनों सहित अन्य मदों में हर महीने 10 से 15 लाख रुपये खर्च करने होंगे। इसलिए पुरानी योजना पर निर्भरता खत्म होने के बाद ही अमृत योजना का संचालन करा सकेंगे। दोहरी व्यवस्था का खर्च उठाने में बजट की समस्या होगी। -श्वेता मिश्रा, नगर पालिका अध्यक्ष
शहर के 10 में सात जोन की टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। शेखपुर और अकरमपुर वार्ड में जलापूर्ति भी की जा रही है। पाइप लाइनों में रोजाना प्रेशर से पानी छोड़ा जा रहा है। जहां भी समस्या आई उसे ठीक कर दिया गया है। सात जोन में अब कोई समस्या नहीं है। तीन जोन में भी टेस्टिंग का काम अंतिम चरण में है। नगर पालिका को इन जोन को हैंडओवर करने के लिए फाइल भेजी गई है। -पंकज रंजन झा, एक्सईएन जल निगम।
इसमें काम कराने वाली कंपनी का पक्ष भी आना चाहिए। तीन बार जुर्माने के बाद उसका क्या कहना है कि कम तक काम पूरा हो जाएगा।
फोटो-7-अमृत योजना का पाइप लाइनों में कुछ इस तरह से होते हैं लीकेज। आर्काइव