उन्नाव। जिला पंचायत की अपर मुख्य अधिकारी और जेई के तबादले को दंडात्मक कार्रवाई माना जा रहा है। तबादले के दूसरे दिन शुक्रवार को भी कार्यालय में इसी को लेकर चर्चा होती रही। अधिकारी न होने से कामकाज भी नहीं हुआ। शासन ने एएमए और जेई को लखनऊ संबद्ध कर दिया है। सीडीओ के छुट्टी पर होने से उनका चार्ज देख रहे डीडीओ को कार्यभार सौंप दिया है।
छह नवंबर को जिला पंचायत के जेई आनंद नारायण, अपर मुख्य अधिकारी वर्तिका के साथ कोतवाली गए थे। ठेकेदार प्रभात सिंह, कुश सिंह, प्रतीक सिंह, रिंकू शुक्ला, सत्येंद्र सिंह व ग्राम प्रधान जालापुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि नाला व सीसी रोड निर्माण का भुगतान न करने पर उन्हें पीटा गया।
जेई ने अभियंता अखिलेश्वर मल्ल व प्रद्युम्न त्रिपाठी की मौके पर मौजूदगी की जानकारी दी थी। पुलिस ने दूसरे दिन एक आरोपी प्रभात सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। बाद में कोर्ट से जमानत मिल गई थी। अन्य आरोपी अंतरिम जमानत पर हैं। मामले के 28 दिन बाद शासन ने अपर मुख्य अधिकारी वर्तिका व अवर अभियंता प्रद्युम्न त्रिपाठी को उन्नाव से हटाकर लखनऊ जिला पंचायत अनुश्रवण कोष्ठक से संबद्ध कर दिया है। प्रभारी सीडीओ (डीडीओ) देव चतुर्वेदी को कार्यभार सौंप दिया है।
डीएम गौरांग राठी ने बताया कि हाल में हुए कुछ घटनाक्रमों और पूर्व के कुछ मामलों का संज्ञान लेकर शासन स्तर से जिला पंचायत एएमए और जेई का तबादला किया गया है।
विकास कार्यों की जांच रिपोर्ट का इंतजार
जिला पंचायत में एई, जेई व अन्य कर्मचारियों की पिटाई की घटना के बाद पंचायतराज विभाग के प्रमुख सचिव ने पांच सदस्यीय टीम बनाकर तीन साल के कामों की जांच कराई थी। टीम ने अलग-अलग ब्लाकों में 12 से अधिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांची थी।
मालूम हो कि मारपीट की एफआईआर दर्ज करने वाले जेई आनंद नारायण ने आरोप लगाया था कि मानकों की अनदेखी कर बनवाया गया नाला और सीसी रोड सहित अन्य कार्यों का भुगतान रोकने पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। घटना में पंचायतीराज विभाग के प्रमुख सचिव ने अधीक्षण अभियंता प्रवीण कुमार के नेतृत्व में दो एई और दो जेई को शामिल करते हुए उन्नाव में जिला पंचायत की ओर से कराए गए प्रमुख विकास कार्यों की जांच कराई थी। इनमें बीघापुर, सुमेपुर, बांगरमऊ, फतेहपुर चौरासी और नवाबगंज आदि ब्लाॅक शामिल थे। अब इनकी जांच रिपोर्ट का इंतजार है। डीएम ने बताया कि यह जांच रिपोर्ट उनके पास नही आएगी, सीधे शासन को जाएगी, शासन से जो निर्देश होंगे उनका पालन किया जाएगा।