उन्नाव। अब नवजात बच्चों को सांस लेने में तकलीफ, कमजोरी या अन्य गंभीर समस्या होने पर सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर करने की मजबूरी नहीं होगी। जिले की नवाबगंज, पुरवा, बांगरमऊ, सफीपुर, हसनगंज सीएचसी में न्यू बोर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट (एनबीसीयू) का संचालन शुरू हो गया है।
जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना औसतन 100 प्रसव होते हैं। लगभग 25 नवजात ऐसे भी होते हैं, जिनमें वजन कम, खून की कमी, सांस लेने में दिक्कत या अन्य तरह की परेशानी होती है। ऐसे नवजातों को तत्काल बेहतर इलाज की आवश्यकता होने से अभी तक जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। अब उन्हें जिला अस्पताल रेफर नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि जिले के 16 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एनबीसीयू यूनिट निर्माण की कवायद शुरू हो गई है। इन सभी अस्पतालों में अब एक साथ पांच बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा पर्याप्त स्टॉफ की तैनाती करके 24 घंटे संचालन शुरू कराया जाएगा। पुरवा, नवाबगंज सहित पांच सीएचसी में यूनिट का संचालन शुरू कर दिया गया है। स्टॉफ नर्स और डॉक्टरों को प्रशिक्षण देकर संचालन कराया जा रहा है।
मदर केयर यूनिट भी संचालित
नवजात का सामान्य वजन 2.5 किलोग्राम होना चाहिए। अगर इससे कम है तो बच्चे को कंगारू मदर केयर की जरूरत होती है। बच्चे को सीने से लगाया जाता है। इससे बच्चे के वजन सहित ऑक्सीजन मात्रा, तापमान आदि सामान्य होता है। इसके लिए मदर केयर यूनिट का निर्माण भी कराया जाएगा। इस यूनिट में नवजात के साथ मां का भी ख्याल रखा जाएगा।
एक यूनिट में तीन स्टाफ नर्स की जरूरत
एक यूनिट का 24 घंटे संचालन के लिए तीन स्टाफ नर्स और एक केयर टेकर की जरूरत है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने स्वास्थ्य महानिदेशालय को पत्र भेजा गया है। अभी फिलहाल जो भी मौजूदा समय स्टॉफ हैं, उन्हें ही प्रशिक्षण देकर संचालन कराया जा रहा है।
दो पावर प्वाइंट बनाए जाएंगे
एनबीएसयू यूनिट संचालन के लिए दो पॉवर प्वाइंट बनाए जाएंगे। बिजली और जनरेटर दोनों की व्यवस्था कराई जाएगी। ताकि बिजली जाने के बाद यूनिट संचालन में किसी प्रकार समस्या न हो। इसके अलावा गर्मी के लिए एसी भी लगवाई जाएंगी।
बोले सीएमओ
जिले की सभी 16 सीएचसी में एनबीएसयू का संचालन के काम शुरू करा दिया गया है। पांच सीएचसी में यूनिट का संचालन शुरू भी हो गया है। अन्य जगहों पर भी जल्द ही संचालन शुरू कराया जाएगा। ताकि गंभीर बच्चों को जिला अस्पताल रेफर न करना पड़े।
- डॉ. एचएन प्रसाद, प्रभारी सीएमओ