फोटो-3-अर्ली इंटरवेंशन में बच्चों को देखते डॉ. राहुल राज। संवाद
-जिला अस्पताल में अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में ओपीडी शुरू, सर्जरी के लिए तीन बच्चे चिह्नित
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव। जन्मजात कटे होंठ, तालू, कान व अन्य जन्मजात समस्या के लिए बच्चों का इलाज शुरू हो गया है। जिला अस्पताल में खुले डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में ऐसे बच्चों में समस्याओं के लिए शुरुआती पहचान कर इलाज शुरू किया गया है।अर्ली इंटरवेंशन की ओपीडी में हाल में ही तीन बच्चों को सर्जरी के लिए चिह्नित किया गया है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत वर्ष 2018 में 62 लाख की लागत से जिला अस्पताल में डिस्ट्रिक अर्ली इंटरवेंशन का निर्माण कराया गया था। इस भवन को बनाने का मुख्य उद्देश्य पांच साल तक के बच्चों को समुचित इलाज की व्यवस्था करनी थी। इसमें ओपीडी से लेकर भर्ती और इसके अलावा जन्मजात कटे होंठ, कान आदि की सर्जरी, मानसिक बीमार आदि बच्चों का इलाज करना था।
सितंबर में यहां बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.राहुल राज और दंत रोग विशेषज्ञ डॉ.शिवानी भदौरिया को तैनात किया गया। इसके बाद दोनों डॉक्टरों ने यहां ओपीडी शुरू कर दी है। हालांकि अभी एक मैनेजर, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, सहायक आदि की जरुरत है। डॉ. राहुल राज ने बताया कि तीन बच्चों को चिन्हित किया गया है। इन्हें बचपन से दिक्कत थी। अब इनका इलाज शुरू हो गया है।
केस एक
पुरवा के दो साल के बच्चे का विकास उम्र के हिसाब से नहीं हो पा रहा था। इससे परिजन परेशान थे। बच्चे को पुरवा सीएचसी से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने जिला अस्पताल के अर्ली इंटरवेंशन सेंटर के लिए रेफर किया। अर्ली इंटरवेंशन सेंटर में बच्चे का इलाज शुरू हो गया है।
केस दो
बिछिया की 15 साल की बच्ची को हृदय संबंधी दिक्कत थी। परिजन सीएचसी पहुंचे तो डॉक्टरों ने जिला अस्पताल के अर्ली इंटरवेंशन सेंटर के लिए रेफर किया। यहां डॉ. राहुल राज ने बच्ची को देखा और इलाज शुरू कराया।
वर्जन
दो डॉक्टरों की तैनाती हो गई है। अन्य स्टॉफ की तैनाती का भी प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की ब्लॉकस्तरीय टीमों द्वारा बच्चाें को चिह्नित कर अर्लीइंटरवेंशन रेफर किया जा रहा है।- डॉ.जेआर सिंह, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम नोडल अधिकारी
क्या है डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर
डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (डीइआईसी) एक ऐसा केंद्र है जहां शून्य से छह वर्ष की आयु के बच्चों में विकासात्मक देरी या दिव्यांगता जैसी समस्याओं के लिए शुरुआती पहचान कर इलाज होता है। यह राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो इन बच्चों को एक ही छत के नीचे समग्र सेवाएं और रेफरल सहायता प्रदान करता है। इसमें बाल रोग विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी, स्टाफ नर्स और तकनीशियन जैसे विभिन्न पेशेवर शामिल होते हैं।