उन्नाव। दुराचार की शिकार नाबालिग को तेरह वर्ष बाद न्याय मिल सका। न्यायाधीश ने दुराचारी को सात साल का सश्रम कारावास व पांच हजार के जुर्माने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश ने जुर्माना न अदा करने पर एक साल के अतिरिक्त कारावास के भी आदेश दिए हैं। घटना पुरवा कोतवाली के अंतर्गत एक गांव में वर्ष 2002 की है।
पुरवा कोतवाली क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने एक सितंबर 2002 को कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी 15 वर्षीय पुत्री सुबह खेतों में शौच के लिए गए थी। काफी समय बाद गांव के ही एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी लड़की को सर्वेश अपने साथ ले जा रहा था। इसके करीब आठ दिन बाद उसकी पुत्री लौटकर आई तो उसने बताया कि सर्वेश उसे जबरन अपने साथ बहन के घर ले गया और वहीं रेप किया।
पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। तभी से मामला न्यायालय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट में विचाराधीन था। मामले की सुनवाई के दौरान सहायक शासकीय अधिवक्ता योगेश कुमार सिंह की पेश की गई दलीलों को ध्यान में रखते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश संजीव यादव ने आरोपी सर्वेश को दोषी करार देते हुए अलग-अलग धाराओं में सात साल के सश्रम कारावास व पांच हजार जुर्माना अदा करने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा न्यायाधीश ने जुर्माना अदा न करने पर एक साल के अतिरिक्त कारावास की भी सजा सुनाई है।