उन्नाव/बीघापुर। बीघापुर में बना सौ शैय्या अस्पताल केवल नाम का ही है। यहां पर चिकित्सा अधीक्षक की नियुक्ति के बाद ओपीडी तो चालू हुई लेकिन अल्ट्रासाउंड, एक्सरे और सीबीसी जांच की सुविधा अभी तक नहीं है। प्रसव कक्ष और नवजातों की देखभाल के लिए जरूरी उपकरण न होने से गर्भवतियों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है।
28 जून 2024 को सौ शैय्या अस्पताल में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके रमन की तैनाती की गई थी। चार दिन बाद नौ पुरुष डॉक्टर और तीन महिला डॉक्टर सहित 15 पैरामेडिकल स्टॉफ की भी तैनाती कर दी गई। इससे अस्पताल में ओपीडी तो शुरू हो गई लेकिन जांच की सुविधा नहीं दी गई। एक्सरे, अल्ट्रासाउंड, सीबीसी सहित अन्य जांच मशीनें न होने से क्षेत्र की करीब दो लाख आबादी को स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। डॉक्टर केवल लक्षण पूछकर इलाज कर रहे हैं।
वहीं, संसाधन न होने से महिला डॉक्टर प्रसव कराने से भी कतरा रही हैं और गर्भवतियों को जिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। क्षेत्र के चंद्रमौली पांडेय, सुभाष बाजपेई, अमरेश दीक्षित, बेचेलाल रावत और नगर पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि सुधीर बाजपेई आदि ने अस्पताल में उपकरण उपलब्ध कराने और सही तरीके से संचालन कराने के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल के माध्यम से मांग की है।
अस्पताल में नहीं प्रसव की व्यवस्था
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से संबद्ध जच्चा-बच्चा केंद्र में प्रति माह 125 से 150 प्रसव होते है। जबकि 100 बेड के अस्पताल में महिला सर्जन सहित तीन डाॅक्टरों की तैनाती के बाद के पांच महीने बाद अब तक यहां एक भी प्रसव नहीं कराया गया। जो भी गर्भवती अस्पताल पहुंचीं उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इस अस्पताल में प्रसव के समय जच्चा-बच्चा की जीवन रक्षा के लिए आक्सीजन प्लांट का चालू नहीं हो सका। डिलवरी ट्रे, डिजिटल वेट मशीन, डिजिटल क्लॉक और कृत्रिम सांस देने के लिए उपकरण अंबू बैग तक नहीं है।
आईसीयू के संचालन के लिए डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलाजिस्ट सहित अन्य नर्सिंग स्टाफ की जरूरत है। जांच की सुविधा के लिए उपकरणों के लिए भी मांगपत्र निदेशालय भेजा गया है। आश्वासन मिला है कि एक महीने में व्यवस्था हो जाएगी।
- डॉ. रमेश रमन, सीएमएस सौ शैय्या अस्पताल