गांव में पंचायत चुनाव के दौरान जातीय लामबंदी तेज हो गई थी। इस बीच जब
दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ तो यह आग में घी का काम किया। मतदान के दिन
हुई लामबंदी बरकरार रही।
दोनों पक्ष एक-दूसरे को देख लेने की धमकी देते
रहे। इस बीच जब पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं किया तो उनका आक्रोश बढ़ गया।
एसपी से शिकायत के बाद दूसरे पक्ष को लगा कि उसका वजूद खतरे में पड़ गया
है।
ऐसे में उन्होंने शिकायतकर्ता पक्ष को पीट कर सबक सिखाने की कोशिश की,
लेकिन दूसरा पक्ष भी लामबंद हो चुका था। गांव में पहुंची पुलिस ने एक ही
पक्ष के लोगों को हिरासत में लिया।
इस वजह से दूसरा पक्ष फिर आक्रामक हो
गया। दोनों पक्ष किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है, जिसका परिणम
है कि ताबड़तोड़ फायरिंग और पथराव हुआ।