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खुफिया व पुलिस के ढीले सूचनातंत्र ने बढ़ाईं मुश्किलें

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शहर के छोटा चौराहा पर बैरिकेडिंग करते कर्मचारी। - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। दिल्ली की तब्लीगी जमात से आए लोगों में कोरोना संक्रमण पाए जाने के बाद सरकार ने पुलिस को जमातियों की तलाश के निर्देश दिए। एसपी उन्नाव ने कोतवाली प्रभारियों व खुफिया एजेंसियों को अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। लेकिन पुलिस की लापरवाही से पुरवा से शहर पहुंचे संक्रमित ने जिले के लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।
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शहर के मोहल्ला शेखवाड़ा में 16 अप्रैल को एक जमाती के संक्रमित होने की पुष्टि के बाद प्रशासन और पुलिस उल्टे पैर दौड़ पड़ी। बताते चले कि लगभग 8 दिन पहले जमातियों की तलाश में एसपी विक्रांतवीर ने मस्जिद और मदरसा के साथ मुस्लिम बहुल इलाकों में पुलिस को सर्च अभियान चलाने के निर्देश दिए थे। एक दिन के अभियान में पुलिस ने किसी जमाती के न मिलने की पुष्टि की। जबकि शहर कोतवाली क्षेत्र में 16 अप्रैल को मिला जमाती 5 मार्च को अपने 11 साथियों के साथ पुरवा पहुंचा और दो मस्जिदों में रहकर क्षेत्र में घूम-घूमकर धर्म का प्रचार करता रहा।
22 मार्च को जनता कर्फ्यू और 25 मार्च से लॉकडाउन होने के बाद इन जमातियों को पुरवा कस्बे के ही एक युवक ने अपने घर में शरण दी। 29 मार्च को यह जमाती बिना पुलिस-प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग को जानकारी दिए बगैर बस से शहर आ गए और अपने-अपने घर चले गए। हसनगंज के मोहान कस्बे के मोहल्ला सलखेमऊ निवासी जमाती शहर के मोहल्ला शेखवाड़ा में अपने दोस्त के घर जाकर रहने लगा। 29 मार्च से 13 अप्रैल तक 15 दिन यह संक्रमित जमाती लोगों को खतरे में डालता रहा और पुलिस और खुफिया को इसकी भनक नहीं लगी। पुलिस का खुफिया तंत्र पहले ही मजबूत होता तो 15 दिन तक शहर व लॉकडाउन के बाद 5 दिन तक संक्रमित जमाती पुरवा में नहीं रुक पाता। एसपी विक्रांतवीर ने बताया कि देखवाया जाएगा कि किस स्तर पर चूक हुई है।
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