उन्नाव। जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था खुद बीमार है। इससे मरीजों का इलाज केवल काम चलाऊ ही हो पा रहा है। डॉक्टरों व स्टाफ की कमी से ट्रॉमा सेंटर का न ही बर्न यूनिट संचालन शुरू हो पाया। इसको लेकर शासन से कई बार पत्राचार भी किया गया, लेकिन नतीजा शून्य रहा। इससे व्यवस्था जस की तस है।
नौ साल बाद भी ट्रॉमा सेंटर को नहीं मिला स्टाफ
जिला अस्पताल में साल 2016 में 117.49 करोड़ की लागत से ट्रॉमा सेंटर का निर्माण कराया जा चुका है। यहां मरीजों के इलाज के लिए सीटी स्कैन के साथ पांच वेंटिलेटर, आठ इंफ्यूजन पंप व चार बाईपेप मशीनें रखवा दी गई हैं। इनकी कीमत डेढ़ करोड़ से अधिक है। इसमें सीटी स्कैन का लाभ तो मरीजों को मिल रहा, लेकिन अन्य मशीनों का संचालन न होने से गंभीर घायलों को इमरजेंसी से कानपुर हैलट रेफर किया जाता है। ट्रॉमा सेंटर में दो एनेस्थीसिया ट्रॉली के साथ सी आर्म मशीन, ऑटोक्लेव होरीजेंटल, एबीजी मशीन की आवश्यकता है। साथ ही दो जनरल सर्जन, तीन इमरजेंसी मेडिकल अफसर, ऑपरेशन थियेटर टेक्नीशियन तीन, लैब टेक्नीशियन के दो पद हैं। इसमें लैब टेक्नीशियन का एक पद भरा हुआ है। बाकी सभी रिक्त हैं।
नहीं संचालित हो सका बर्न यूनिट
जिला अस्पताल में 2020 में एक करोड़ रुपये की लागत से बर्न यूनिट का निर्माण कराया गया था। तब जिले के लोगों को उम्मीद जगी थी अब आग से जले मरीजों को जिला अस्पताल में ही समुचित इलाज मिलेगा, लेकिन लोगों की उम्मीद पांच साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी। अभी तक यूनिट का संचालन शुरू नहीं हो सका। आग से जले मरीजों को वार्ड एक में जोकि आठ बेड का वार्ड बनाया गया है। इसी में दो एसी लगा दी गई हैं। इसी में मरीजों को भर्ती कर दिया जाता है। वहीं, 40 फीसदी जले मरीज को भी लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। यूनिट में प्लास्टिक सर्जरी के लिए एक सर्जन, दो जनरल सर्जन, तीन ईएमओ, छह स्टाफ नर्स, एक फिजियोथेरेपिस्ट, तीन ड्रेसर और छह एमटीडब्ल्यू के पद सृजित हैं, लेकिन पांच साल बाद भी किसी की तैनाती नहीं हो सकी।
कार्डियोलॉजी भी दो साल से बंद
जिला अस्पताल में ह्रदयरोग विभाग का छह अगस्त 1993 में तत्कालीन राज्यपाल मोतीलाल बोरा कार्डियोलॉजी ने शुभारंभ किया था। इसमें एक आईसीयू वार्ड, छह बेड का वार्ड सहित अन्य उपकरण भी हैं। यहां एक ह्रदयरोग विशेषज्ञ, दो स्टाफ नर्स, एक वार्ड ब्वॉय, एक इसीजी टेक्नीशियन की तैनाती हुई थी। वर्तमान में एक ईसीजी टेक्नीशियन, एक स्टाफ नर्स, एक बीपी मॉनीटर तैनात है, लेकिन जिला अस्पताल में हृदय रोगियों को इलाज के लिए समुचित व्यवस्था नहीं है। यहां तैनात हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके पांडेय अगस्त 2023 में सेवा निवृत्त हो गए थे। तब से हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी।
31 स्टाफ नर्सों की और जरूरत
जिला अस्पताल और इमरजेंसी वार्ड दोनों को मिलाकर 150 बेड हैं। इन पर मरीज भर्ती किए जाते हैं। इसमें इमरजेंसी वार्ड में 30 बेड, दो जनरल वार्ड में 96 और ट्रॉमा सेंटर में 20 बेड हैं। इसके अलावा चार बेड का आइसोलेशन वार्ड भी है। यह सब स्टाफ नर्स के भरोसे रहता है। मौसम में बदलाव होने से जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। तीन शिफ्ट में भर्ती होने वाले 150 मरीजों के लिए जिला अस्पताल में कम से कम 66 स्टाफ नर्सों की जरूरत है, लेकिन इसके सापेक्ष केवल 34 नर्स ही तैनात हैं।
ट्रॉमा सेंटर, बर्न यनिट, सर्जन, हृदय रोग विशेषज्ञ और स्टाफ नर्सों की कमी की जानकारी शासन को दी जा चुकी है। तैनाती के लिए कई बार पत्र भी भेजा गया। लगातार प्रयास के बाद भी तैनाती नहीं हुई। प्रयास जारी है कि तैनाती हो और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हो सके। -डॉ.आरए मिर्जा, सीएमएस, जिला अस्पताल