बीघापुर के दूलीखेड़ा में पांडु नदी पर बने पुल से निकलती बैलगाड़ी।
- फोटो : बीघापुर के दूलीखेड़ा में पांडु नदी पर बने पुल से निकलती बैलगाड़ी।
उन्नाव/बीघापुर। मुहिम आखिरकार रंग लाई। 14 साल पहले बाढ़ में बहा पुल फिर बनकर तैयार हो गया है। ग्रामीणों ने फिलहाल आवागमन शुरू कर दिया है। हालांकि अभी पुल को जोड़ने वाली सड़क पर डामर-गिट्टी की आखिरी परत बिछनी है। कटान रोकने के लिए बोल्डर का काम भी होना है।
तहसील क्षेत्र में गंगा व पांडु नदी के बीच बसी दूलीखेड़ा और लालखेड़ा ग्राम पंचायतों को जोड़ने के लिए 14 साल पहले बना पुल उसी साल आई बाढ़ में बह गया था। करीब पांच हजार लोगों को आवागमन के लिए अभी तक लकड़ी के पुल या नदी के पानी से होकर आवागमन करना पड़ रहा था। दोनों ग्राम सभाओं के किसानों और पशुपालकों को खासी दिक्कत हो रही थी। किसान करीब 10 किलोमीटर का चक्कर लगाकर खेतों पर पहुंचते थे। परेशान ग्रामीण अफसरों और जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाते रहे लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
अमर उजाला ने इस समस्या को दूर कराने के लिए मुहिम चलाई तो प्रशासन ने नए सिरे से पुल बनाने के लिए डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) तैयार कर शासन को भेजी थी। इसके बाद मार्च 2023 में शासन ने दो करोड़ की लागत से 30 मीटर लंबा पुल बनाने को मंजूरी दी और पीडब्ल्यूडी ने काम शुरू कराया। पुल का निर्माण पूरा हो चुका है। पुल को जोड़ने के लिए दोनों तरफ की सड़क भी बन गई है, आखिरी कोट का ही काम बाकी है। पीडब्ल्यूडी हरदयाल अहिरवार ने बताया कि पांडु नदी पुल का काम पूरा हो गया है। कुछ छुटपुट काम बाकी हैं, उन्हें भी जल्द ही पूरा करा लिया जाएगा।
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अभी ये काम होने हैं
पुल मार्ग को बक्सर मार्ग से जोड़ने के लिए एक किलोमीटर रास्ता अभी कच्चा है। इस पर पक्की रोड बनाई जाएगी। पुल की अप्रोच रोड को कटान से बचाने के लिए बोल्डर लगाने का काम होना है। कुछ स्थानों पर कंक्रीट भरने का काम होना है।
बोले ग्राम प्रधान
दूलीखेड़ा के ग्राम प्रधान श्रीकृष्णा यादव ने कहा कि पुल बनने से काफी राहत मिली है। लोगों ने आवागमन शुरू कर दिया है। जो काम बाकी है, वह भी एक महीने में पूरा होने की बात पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने कही है। लालखेड़ा के प्रधान कृष्ण देव ने बताया कि पुल न होने से लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती थी। पुल बनने से बहुत राहत मिली है।