घायल रमेश सोनी का जिला अस्पताल में इलाज करते चिकित्साकर्मी
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पंसरिया गांव निवासी सुरेश रैदास पुत्र भगौती शहर में टेनरी श्रमिक है। डेढ़ साल पहले उसकी पत्नी की मौत हो चुकी है। जबकि मानसिक रूप से बीमार बेटा सोनू महीनों से लापता है। करीब एक महीने बाद मंगलवार को सुरेश अपने गांव गया था। देर शाम वह नशे में धुत होकर गाली-गलौज कर रहा था।
मोहल्ले में ही रहने वाले रमेश सोनी (40) पुत्र श्रीकृष्ण ने विरोध किया तो सुरेश ने उसपर तमंचे से फायर झोक दिया। कंधे में गोली लगने से रमेश वहीं गिर गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया तो उसने भीड़ पर देशी सुतली बम फेंकने शुरू कर दिए। बम के हमले से गांव का रामनाथ व उसका बेटा बलजीत, मुन्नीलाल और कमल कुमार भी घायल हो गए। इसी बीच एसआई एपी मिश्रा, अरुण कुमार कई पुलिस जवानों के साथ पहुंचे।
पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से उसे पकड़ने का प्रयास किया तो वह बम फेंकते हुए भगने लगा। करीब एक किमी दूर हरिसिंहपुर गांव में भीड़ और पुलिस ने उसे घेर लिया तो खुद को पुलिस से बचाने के लिए उसने जेब से चाकू निकाल अपनी गर्दन पर रख ली और आत्महत्या की धमकी देते हुए खुद को घायल कर लिया। पुलिस ने उसे आनन-आनन फानन बीघापुर सीएचसी पहुंचाया जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
वही गोली और बम के हमले से घायल रमेश सोनी को जिला अस्पताल से कानपुर रेफर किया गया है। जबकि मुन्नीलाल, रामनाथ, कमल कुमार और बलजीत को बीघापुर स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। बीघापुर थानाध्यक्ष मनोज मिश्रा ने बताया कि हमला करने वाले सुरेश का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उसने ऐसा क्यों किया इसकी जांच की जा रही है। जमीन-जायदाद के विवाद या कब्जेदारी के बिंदुओं को भी खंगाला जा रहा है।