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माघ मेला में बंदी को लेकर असमंजस में टेनरी संचालक

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उन्नाव। पिछले दिनों 12 महीने में छह महीने की बंदी झेल चुकी टेनरियों पर एक बार फिर बंदी के बादल मंडराने लगे हैं। प्रयागराज में 10 जनवरी 2020 से माघ मेला की शुरुआत होने जा रही है। माना जा रहा है कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी कई चरणों में टेनरियों को बंद रखा जाएगा। पिछले वर्ष माघ मेला के दौरान दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र की 14 टेनरियों तीन-तीन दिन के अंतराल में बंद रखा गया था। जबकि बंथर औद्योगिक क्षेत्र की 27 टेनरियों को पूरे तीन महीने के लिए बंद कर दिया गया था। इस दौरान टेनरियों को करीब दो हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा था।
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प्रयागराज में 10 जनवरी से माघ मेला की शुरुआत होगी। इस दौरान कई चरणों में शाही स्नान का आयोजन होगा। शाही स्नान के दौरान गंगा में प्रदूषित पानी का उत्प्रवाह न हो इसके लिए टेनरियों को बंद रखा जाता है। जनवरी 2019 में आयोजित हुए माघ मेला में प्रत्येक शाही स्नान से तीन दिन पहले दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र की टेनरियों को बंद करने के आदेश दिए गए थे। बंदी के दायरे में वह टेनरियां आई थी जिनका उत्प्रवाह सीधे गंगा में पहुंचता था। जबकि औद्योगिक क्षेत्र की बंथर की 27 टेनरियों को 15 दिसंबर 2018 से 15 मार्च 2019 तक पूरी तरह बंद रखना पड़ेगा। बंदी से उन्नाव के चर्म उद्योग को दो हजार करोड़ की चपत लगी थी। इसके बाद एनजीटी के आदेश पर जून 2019 से सितंबर तक लगातार तीन माह तक टेनरियां बंद रही। जिसमें आयात व निर्यात मिलाकर चर्म उद्योग को लगभग 6 हजार करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा था। सितंबर माह से शुरू हुई टेनरियां अभी रफ्तार पकड़ भी नहीं पाई हैं कि माघ मेला के आयोजन ने टेनरी संचालकों को एकबार फिर चिंता में डाल दिया है। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों के अनुसार माघ मेला के दौरान टेनरियों को इस बार भी बंद रखने का निर्णय लिया जा सकता है। हालांकि अभी शासन स्तर से कोई आदेश आया नहीं है। अगर आदेश आएगा तो टेनरियाें को बंद कराया जाएगा।
क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड अधिकारी विमल कुमार ने बताया कि टेनरियों को बंद रखने को लेकर शासन, एनजीटी या उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कोई आदेश नहीं प्राप्त हुए हैं। माघ मेला के दौरान टेनरियों व उत्प्रवाह वाली औद्योगिक इकाइयों को पूरी तरह से बंद रखना है या फिर शाही स्नान पर तीन-तीन दिन के अंतराल पर बंद रखना है, अभी तय नहीं है। उन्होंने बताया जैसे ही आदेश आएगा उद्यमियों को अवगत कराकर उसका अनुपालन कराया जाएगा।
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उत्तर प्रदेश चर्म उद्योग एसोसिएशन के उन्नाव चैप्टर के अध्यक्ष ताज आलम ने बताया किए प्रदूषण नियंत्रण के आदेश का पालन तो करना ही होगा। लेकिन बार-बार पड़ रही बंदी की मार से चमड़ा बनाने वाली टेनरियों के साथ ही जूता, चप्पल, बेल्ट, सैडलरी, जैकेट, बैग सहित अन्य चीजें बनाने वाली फैक्टरियों में चमड़े की कमी होने पर असर पड़ेगा।
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