मुआवजा न मिलने से नाराज किसानों ने आउटर रिंग रोड निर्माण के लिए भूमि का समतलीकरण करने पहुंची टीम का किसानों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। काफी प्रयास के बाद भी बात नहीं बनी तो टीम को लौटना पड़ा।
कानपुर ,कानपुर देहात और उन्नाव के गांवों से होकर निकल रहे आउटर रिंग रोड के लिए सिकंदरपुर कर्ण के रघुनाथ खेड़ा, कंचन खेड़ा, गड़सर, आटा , सुपासी आदि के किसानों की जमीन का अधिग्रहण 2023 में किया गया था। नियमानुसार किसानों को सर्किल रेट से चार गुना अधिक मुआवजा किसानों को दिया जाना था। जिस समय भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई थी, सुपासी ग्राम सभा क्षेत्र का सर्किल रेट तीन लाख रुपये प्रति बीघा था। जिसके तहत किसानों को 12 लाख रुपए प्रति बीघा की दर से मुआवजा मिलना था। अकेले सुपासी ग्राम सभा की करीब 25 बीघा जमीन अधिगृहीत की गई थी।
मई 2023 में किसानों से रजिस्ट्री हुई थी और 60 दिन के भीतर, मुआवजा भुगतान का लिखित वादा किया गया था। किसानों को एक-एक नोटिस दी गई थी। जिसमे 18 जुलाई 2023 तक सभी को अपने प्रपत्र तहसील में जमा करने थे। लेकिन अभी भी पचास से अधिक किसान अपने प्रपत्र लेखपाल और तहसील के चक्कर लगा रहे हैं। रिंग रोड बनाने के लिए गुरुवार शाम करीब सात बजे निर्माण एजेंसी की टीम जेसीबी व अन्य मशीनें लेकर रघुनाथ खेड़ा गांव के सामने पहुंचीं।
सूचना मिलते ही सौ से अधिक किसान पहुंच गए और काम रोकवा दिया। किसानों ने मुआवजा का भुगतान न होने तक रिंग रोड का निर्माण न करने देने की चेतावनी दी। किसानों को आक्रोशित देख काम करने पहुंची टीम मशीनें लेकर लौट गई। क्षेत्रीय लेखपाल हिमांशु ने बताया कि उन्हें कुछ दिन पहले ही यहां का चार्ज मिला है। बहुत जानकारी नहीं है, लेकिन जिन किसानों के प्रपत्र जमा हो गए हैं उन्हें उनके बैंक खाते में भुगतान कर दिया गया है।
जिनका बाकी है उनकी भी प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा। वहीं किसानों में शिशुपाल, ज्ञानेंद्र,राम किशुन,पप्पू यादव, रोशन लाल, रामदुलारे, राम बहादुर, फूल कुमार, बच्चूलाल, उमाशंकर,सियाराम, सुरेंद्र आदि ने बताया कि मुआवजा न मिलने तक काम नहीं करने दिया जाएगा। तहसीलदार अविनाश चौधरी ने बताया कि लेखपाल से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट लेकर मामले को हल कराया जाएगा।