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सिस्टम फेल; यहां भी खेल

Sun, 30 Apr 2017 12:17 AM IST
उन्नाव
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जींद पेट्रोल पंप लूट - फोटो : SELF
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तेल के खेल में पूरा नेटवर्क काम करता है। पेट्रोल पंपों पर घटतौली व मिलावटखोरी रोकने के लिए विभागीय व्यवस्था ही मिलीभगत का शिकार है। हाल यह है कि जिला पूर्ति व बाट-माप विभाग के अधिकारी ही इस खेल को आखिरी अंजाम तक पहुंचाते हैं। पेट्रोलपंप संचालक मामूली रकम के एवज में लोगों की जेबों पर डाका डालन से नहीं चूकते हैं। लंबे समय से इन दोनों विभागों के अफसरों ने पेट्रोल पंपों की चेकिंग नहीं की है। इस कारण पेट्रोल पंपों पर जमकर घटतौली और मिलावट की जा रही है।

जिले में करीब एक सैकड़ा पेट्रोल पंप हैं। अधिकांश पेट्रोल पंपों पर उपभोक्ताओं को पूरा पेट्रोल नहीं दिया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों के कई पेट्रोल पंपों पर पुरानी मशीनें लगी हैं। जिसमें रुपये फीड करने का सिस्टम नहीं है। इन मशीनों में घटतौली करना आसान होता है। 25 से 30 पैसे का तेल हर उपभोक्ता को कम ही मिलता है। वहीं कई पंपों पर कर्मी पेट्रोल व डीजल देने में खेल करते हैं। मशीन बंद होते ही तुरंत एक झटके से पाइप टंकी से निकालकर ऊपर कर लेते हैं।
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जिससे पाइप में बचा पेट्रोल ऊपर आ जाता है। इससे भी कर्मी प्रति लीटर 20 से 30 ग्राम पेट्रोल मार देते हैं। मीटर में जीरो दिखे बिना ही जल्दी में मशीन आन कर दी जाती है। अमूमन ग्राहक  इसे नजरअंदाज कर देते हैं। ग्रामीणों क्षेत्रों में लगभग सभी पंपों पर पुरानी मशीनें ही लगी हैं। संचालक जानकर इन मशीनों को लगाते हैं। जिससे घटतौली आसानी से की जा सके। यही नहीं पंपों पर पेट्रोल व डीजल में मिलावट का भी काला कारोबार खूब चल रहा है। चकलवंशी, सफीपुर में स्थित पेट्रोल पंपों के अलावा बांगरमऊ, हसनगंज, औरास, बीघापुर, पुरवा, मौरावां, नवाबगंज, भगवतंनगर आदि में भी पुरानी मशीनों की सहायता से घटतौली की जा रही है।

नहीं दी जा रही सुविधाएं
शहर व ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर पेट्रोल पंपों पर नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। पंपों पर न तो फ्री हवा का इंतजाम हैं और न ही पीने के लिए शुद्ध पानी ही उपभोक्ताओं को उपलब्ध होता है। कुछ पेट्रोल पंपों पर न शेल्टर की व्यवस्था है और न ही बाथरूम की। पेट्रोल पंपों पर नपना भी नहीं मिलता है। ग्राहकों के मांगे जाने पर भी टेस्ट पेपर नहीं दिए जाते हैं। कई पंपों पर डेन्सिटी  (पेट्रोल का गाढ़ापन) टेस्ट की भी व्यवस्था नहीं है।

इलेक्ट्रानिक चिप से लगा रहे चूना
पेट्रोल पंपों में इलेक्ट्रानिक चिप मशीनों के पल्सर (मशीन का पार्ट) में लगाई जाती है। इस समय पंप मालिक दो तरह की चिप यूज कर रहे हैं। इस चिप की कीमत 50 से 100 रुपये तक होती है। पंप मालिक किसी इंजीनियर सेट कर प्रोग्रामिंग कर सॉफ्टवेयर डलवाते हैं इसके एवज में वे इंजीनियर को दो से पांच हजार रुपये देते हैं। सॉफ्टवेयर में यह फीड होता है कि कितना पेट्रोल या डीजल चोरी करना होता है। मसलन उन्होंने सॉफ्टवेयर में पांच प्रतिशत चोरी फीड किया है तो एक लीटर में 50 ग्राम तेल चोरी होता है। इसे चिप को रिमोट से ऑपरेट किया जाता है इसकी रेंज 100 से 200 मीटर तक होती है। सूत्रों के मुताबिक शहर में पांच से दस प्रतिशत की तेल चोरी की जा रही है।
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मीटर तेज भागे तो समझों कुछ गड़बड़ है
इस खेल को पकड़ना मुश्किल है, लेकिन नामुमकिन नहीं है। इस खेल से जुड़े शातिर के मुताबिक पेट्रोल चोरी को पकड़ने के लिए आपको पेट्रोल पंप की रीडिंग देखनी होगी। अगर मशीन में चिप नहीं लगी है तो मीटर रीडिंग सामान्य (1,2,3) चलेगी, लेकिन जब मशीन  में चिप लगी है तो रीडिंग (3,6,9) तेजी से भागती है। तो इसकी एवज में चोरी का पता लगाया जा सकता है।
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