बिछिया विकासखंड में कुल 57 ग्राम पंचायते हैं। इनमें अधिकांश में इसी वित्तीय वर्ष में सोलर लाइटों की खरीद की गई है। इसकी खरीद में ग्राम पंचायत विकास अधिकारियों ने शासन के आदेश की जमकर धज्जियां उड़ार्इं। कमीशन के खेल में इन ग्राम स्तरीय अधिकारियों ने मानक को दरकिनार कर खुले बाजार में निजी कंपनियों से सोलर लाइटों की खरीद की।
कुछ गांवों में तो आईडी जनरेट करके धनराशि निकाली गई तो कुछ में बिना आईडी के ही पैसा निकाला गया। अमर उजाला ने 30 जून को इस घोटाले को उजागर किया था। इसके बाद लगातार इससे संबंधित खबरें छापीं। मामले को सीडीओ ने संज्ञान में लिया और इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी।
टीम में शामिल जिला उपायुक्त उद्योग केंद्र सुनील कुमार, जिला समाज कल्याण अधिकारी विवेक वाजपेयी और परियोजना अधिकारी नेडा एसके दुबे ने कुछ गांवों में जाकर स्थलीय निरीक्षण किया था। साथ ही सूत्रों के जरिए मिले कुछ अभिलेखों से जो जांच रिपोर्ट तैयार की उसमें करीब 111 सोलर लाइटों की खरीद में लगभग 15 लाख रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ। सीडीओ के कड़े रुख को देखते हुए जांच टीम ने मंगलवार को अपनी अनिन्तम जांच रिपोर्ट उन्हें सौंप दी।
कीमत 14 हजार और भुगतान हुआ 26 हजार रुपये
जांच टीम ने जो रिपोर्ट दी है उसके अनुसार, ग्राम पंचायतों से सोलर लाइट की खरीद में निजी कंपनियों को 26,500 रुपये से लेकर 27000 रुपये प्रति लाइट का भुगतान किया है। जबकि नेडा से यह लाइट सिर्फ 21160 रुपये में ही मिल जाती। इसके अलावा लाइट दोयम दर्र्जें की मिली हैं। निजी कंपनियों ने 75 वाट की जगह मात्र 50 वाट की ही लाइट भी लगाई है। सूत्रों की मानें तो असल में इन लाइटों की असली कीमत 13 से 14000 रुपये प्रति लाइट ही है। सूत्रों का कहना है कि राज्य व 14वें वित्त अनुदान से इन सोलर लाइटों की खरीद का भुगतान किया गया है।
सीडीओ के आदेश को किया दरकिनार
22 जुलाई को सीडीओ की ओर से एक पत्र बिछिया बीडीओ को भेजा गया था। निर्देश दिए गए थे कि बीडीओ व एडीओ (पंचायत) खरीद से संबंधित सभी अभिलेख व बैंक स्टेटमेंट जांच टीम को उपलब्ध कराएं। लेकिन बीडीओ व एडीओ (पं.) ने इन आदेशों को दरकिनार करते हुए 26 जुलाई तक कोई भी अभिलेख नहीं दिए। जांच टीम के सदस्यों ने रिपोर्ट में इसका भी जिक्र किया है।
अभिलेख मिले तो करोड़ों का खुलेगा घोटाला
सूत्रों की मानें तो 15 लाख का घोटाला सिर्फ 15 गांवों में ही मिला है। जबकि सोलर लाइटों की खरीद लगभग 40 ग्राम पंचायतों में हुई है। ऐसे में यदि सभी गांवों से जुड़े अभिलेख मिल जाएंगे तो यह घोटाला 2 से 3 करोड़ के आसपास निकलेगा। जांच टीम के एक सदस्य के मुताबिक, सोलर लाइटों में कमीशन का खेल केवल बिछिया ब्लाक में ही नहीं किया गया है जबकि जिले के अधिकांश विकासखंडों में यही हुआ है। यदि इसकी सही ढंग से जांच कराई जाए तो मामला 10 करोड़ रुपये से भी ऊपर जा सकता है।