भगवान के स्मरण मात्र से मनुष्य पाप मुक्त हो जाता
है। प्रभु सेवा और प्रभु भक्ति से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं।
यह बात कथा व्यास विमलेश शुक्ल जी महाराज ने प्रवचन के दौरान कही।
उन्होंने
भक्तों को बताया कि नारद जी ने ब्रह्मवादी ऋषियों की सेवा कर परमपद
प्राप्त किया। आत्मदेव नाम का ब्राह्मण भक्त संतानहीन था। महात्मा की कृपा
से प्राप्त फल को अपनी पत्नी को खाने को दिया। जिसे उसने न खाकर गाय को
खिला दिया, जिससे गोकर्ण नामक ज्ञानी बालक का जन्म हुआ।
इस कारण
मनुष्य के जितने सत्कर्म होते हैं, उतने दिन उसे स्वर्ग का राज्य प्राप्त
होता है। पुण्यकर्म समाप्त होने पर उसे पुन: कष्ट भोगना पड़ता है।
यह
प्रसंग सुनाते हुए कथा व्यास ने संगीतमयी कथा का रसपान कराया। इस दौरान
पूजन यजमान डा. विजय कुमार मिश्र, ममता मिश्रा, डा. राजीव दीक्षित व
धर्मेंद्र आदि ने किया। संगीत निर्देशन केडी शर्मा व नाल वादन में गौरव ने
संगत दी।