दो दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश से जगह-जगह जलभराव
हो गया। क्या गलियां, क्या चौराहे और क्या हाईवे सभी जलमग्न हो गए। कई
बस्तियां टापू बन गईं। रास्तों पर एक से डेढ़ फिट तक पानी भरा रहा। यह हाल
तब है, जबकि शहर को जलभराव की समस्या से छुटकारा दिलाने को पिछले माह नगर
पालिका ने 31 लाख रुपये खर्च कर शहर के छह नालों की सफाई करवाई थी।
शुक्रवार
की सुबह से शुरू हुई बारिश रुक-रुक कर दिनभर होती रही। रात में भी बारिश
जारी रही। शनिवार सुबह बारिश शहर के लोगों के लिए आफत लेकर आई।
शहर
में चारों ओर जलभराव की स्थिति बनी रही। शहर की गलियां और चौराहे जलमग्न
हो गए थे। बारिश का पानी नालों से उफनाकर रोड पर आ गया। घरों के बाहर तक
नालों का गंदा पानी भर गया। मजबूरन महिलाओं और बच्चों को इसी गंदे पानी से
होकर निकलना पड़ा।
आश्चर्य की बात तो यह है इस समस्या से
शहरवासियों को निजात दिलाने के लिए नगर पालिका ने 31 लाख खर्च कर शहर के
मुख्य छह नालों की सफाई करवाई थी।
सफाई कार्य को छह ठेकेदारों ने करीब
पंद्रह दिनों तक करवाया। इसके बाद पालिका अधिकारियों ने मान लिया कि अब
पूरे शहर को जलभराव से निजात मिल जाएगी। मात्र 10 से 12 घंटे की बारिश ने
ही पालिका के नाला सफाई अभियान की पोल खोल दी।
शहर की गलियां और
चौराहे पूरी तरह से जलमग्न हो गए। यहां तक जलनिकासी न होने से हाइवे तक में
पानी भर गया। इससे यहां पर आने जाने वाले वाहन सवारों को भीषण कठिनाई का
सामना करना पड़ा। कुछ बस्तियां तो टापू बन गईं।
नगर पालिका की
अधिशाषी अधिकारी रोली गुप्ता ने बताया कि नाला सफाई तो मानकों के अनुसार
करवाई गई थी। बारिश अधिक होने से जलभराव हुआ होगा। यदि नालों से पानी निकल
नहीं पा रहा है तो इनकी दोबारा सफाई करवाई जाएगी।
सफीपुर, बांगरमऊ, हसनगंज, पुरवा, बीघापुर, भगवंतनगर, असोहा, औरास समेत कई क्षेत्रों में बारिश से जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई।