पूछताछ खिड़की पर लोगों की भीड़ लगी रही। वहीं, टिकट काउंटर पर छुट्टी जैसे हालात रहे। हमेशा यात्रियों से भरे रहने वाले जनरल टिकट घर में एक भी यात्री टिकट लेते नजर नहीं आया। गंगाघाट स्थित गंगापुल पर टर्फ बदलने का काम शुक्रवार से शुरू हो गया। रेलवे कर्मचारियों ने जैसे ही गंगापुल पर मेगाब्लाक लेकर टर्फ बदलने के काम शुरू किया, इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही कम हो गई। डेढ़ सैकड़ा से अधिक ट्रेनों वाले इस रूट पर गिनी चुनी ट्रेनें ही पहुंची। यात्री इनमें जबरन घुसकर कानपुर पहुंचने का प्रयास करते रहे। रेलवे ने यात्रियों को कुछ राहत दी है। विभागीय अफसरों ने लोकल यात्रियों के लिए अप लाइन पर दो एलकेएम संख्या-64201 व 64211 और डाउन पर एलकेएम संख्या-64208 व 64260 संचालित रखने के निर्देश दिए हैं। मेगा ब्लाक मिलने में देरी के कारण शुक्रवार का दिन बेकार गया। शाम चार बजे ब्लाक मिलने के बाद काम शुरू किया जा सका। इस बीच डाउन रेल पथ से शताब्दी समेत कई ट्रेनों को भी निकाला गया। सुबह से ब्लाक न मिलने के कारण न तो ओएचई लाइन काटी गई और न ही कोई कार्य शुरू कराया गया। मजदूर रेल पथ सिक्के तलाशने में जुटे रहे। ठेकेदार ने बताया कि मजदूर से शुक्रवार को कोई काम नहीं लिया गया है। क्योंकि ब्लाक नहीं मिला तो पुल पर कोई कार्य नहीं हो सका। गंगाघाट स्टेशन अधीक्षक कुंवर पाल ने बताया कि ब्लाक मिलने में देरी के कारण शताब्दी समेत अन्य कई ट्रेनों को निकाला गया। शाम 4 बजे ब्लाक मिलने के बाद ओएचई की बिजली काटी गई और कार्य तेजी से शुरू हुआ।
इनसेट
एक्सप्रेस ट्रेनों की भी बढ़ाई गई संख्या
लखनऊ से कानपुर जाने वाली ट्रेनों में कई एक्सप्रेस ट्रेनों को भी संचालित रखने के निर्देश जारी किए हैं। इनमें मरुधर एक्सप्रेस, गोरखपुर एलटीटी एक्सप्रेस, उद्योग नगरी एक्सप्रेस, लखनऊ-पुणे एक्सप्रेस, जनसाधारण एक्सप्रेस, कोलकाता-आगरा एक्सप्रेस, मुजफ्फरपुर-सीतापुर एक्सप्रेस, गोरखपुर-यशवंतपुर एक्सप्रेस, राप्तीसागर एक्सप्रेस, गोरखपुर एक्सप्रेस, लखनऊ-जयपुर, नीलांचल, गरीबरथ, स्वर्ण शताब्दी, चित्रकूट, पुष्पक, अवध, वैशाली, लखनऊ-भोपाल, पीलीभीत, साबरमती, प्रतापगढ़ इंटरसिटी ट्रेनों का संचालन जारी रखा जाएगा।
अप लाइन के टर्फ और स्लीपर भी जर्जर
शुक्लागंज। रेल गंगा पुल पर डाउन रेल पथ के टर्फ और स्लीपर बदलने का कार्य शुरू तो हो गया है, लेकिन अप लाइन के टर्फ और स्लीपर भी जर्जर हो चुके है। सूत्रों के मुताबिक डाउन रेल पथ पर कार्य खत्म हो जाने के बाद अप लाइन पर काशन लगाया जा सकता है। इंजीनियर विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 1998 में अप लाइन पर टर्फ व स्लीपर लगाए गए थे।8 वर्ष बाद ही टर्फ और स्लीपर भी सड़ गए है। बताया कि इसकी रिपोर्ट पूर्व में ही डीआरएम कार्यालय को भेजी जा चुकी है।
शाम 4 बजे के बाद मिला ब्लाक
शुक्लागंज। मेगा ब्लाक मिलने में देरी के कारण रेल गंगा पुल पर टर्फ और स्लीपर बदलने के लिए शुक्रवार का दिन बेकार गया। शाम चार बजे ब्लाक मिलने के बाद काम ने रफ्तार पकड़ी। इस बीच डाउन रेल पथ से शताब्दी समेत कई ट्रेनों को भी निकाला गया। जिस तरह से रेलवे ने अपनी तैयारी कर 11 नवंबर से युद्व स्तर पर कार्य शुरू कराने की बात कहीं थी आज ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। सुबह से शाम तक ब्लाक नहीं मिला जिस कारण न तो ओएचई लाइन काटी गई और न ही रेलवे पुल पर कोई कार्य शुरू कराया गया। हलांकि मजदूरों को जरूर पुल पर काम पर लगाया गया लेकिन जब उन्हें कोई कार्य हीं नहीं बताया गया तो वहीं मजदूर डाउन रेल पथ की गिट्टियों के नीचे दबे एक दो और पांच के सिक्कें तलाशने में जुटे रहे। इस बारे में जब कुछ मजदूरों से बात की गई तो वह बोले की जब कोई काम नहीं लिया जा रहा तो सोचा ट्रेन में बैठे यात्रियों द्वारा गंगा में फें के जाने वाले ऐसे सिक्कों को तलाशा जाएं जो पुल पर ही गिर जाते है। वहीं रेलवे के एक ठेकेदार का कहना रहा कि जो भी मजदूर लगाए गए है वह डेली वेजेस पर है काम के बदले पैसे नहीं तो कुछ नहीं। आज उनसे कोई काम नहीं लिया गया है। क्योंकि ब्लाक नहीं मिला तो पुल पर कोई कार्य नहीं हो सका। हालांकि रेलवे स्टेशन पर लगाए गए मजदूरों और रेलवे कर्मियों द्वारा टर्फ और स्लीपर ले जाने के लिए डिपलोरी मशीन को जरूर तैयार किया गया। वहीं स्टेशन अधीक्षक कुंवर पाल के अनुसार शुक्रवार को भी शताब्दी समेत अन्य कई ट्रेनें कानपुर से लखनऊ के बीच डाउन रेल पथ से निकाली गई। शाम 4 बजे ब्लाक मिला जिसके बाद ओएचई की बिजली काटी गई और कार्य तेजी से शुरू हुआ। वहीं शुक्रवार को एडीआरएम एस.के. सप्रा पुन: कार्य निरीक्षण को पहुंचे जिन्होंने ब्लाक न मिलने कारण अधीनस्थ रेलवे कर्मचारियों से पूछा कार्य 24 घंटे करने के निर्देश उन्होंने स्टेशन परिसर में दिए।