उन्नाव। उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं वित्त विकास विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद मोची तो ढूंढ़ लिए लेकिन अब उन्हें पक्का दुकान देने के लिए जमीन को लेकर पेंच फंस गया है। यह स्थिति तब है जब वित्तीय वर्ष खत्म होने में एक दिन बचा है।
प्रदेश सरकार ने गरीब मोचियों को पक्की दुकान देने की योजना लागू की थी। योजना में शहरी व ग्रामीण मोचियों को लाभ दिया जाना था। योजना को दो वर्ष में पूरा होना है। योजना शुरू हुए पांच माह बीत चुके हैं लेकिन अनुसूचित जाति वित्त विकास विभाग को जमीन खोजने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पहले विभाग को लाभार्थी खोजे नहीं मिल रहे थे।
मामले में डीएम ने सख्ती दिखाई तो मौरावां से पांच व नवाबगंज और फतेहपुर चौरासी ब्लाक से एक-एक लाभार्थी मिला। अब विभाग इन लाभार्थियों को पक्की दुकान उपलब्ध कराने के लिए जमीन की व्यवस्था नहीं कर पा रहा है। इससे विभाग के साथ लाभार्थी भी परेशान हैे, क्योंकि वित्तीय वर्ष खत्म होने में एक दिन ही बचा है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) ने बताया सात लाभार्थियों की सूची आ गई है। जमीन तलाशी जा रही है। जैसे ही जमीन मिल जाएगी वैसे ही दुकानें बनाकर लाभार्थी को योजना का लाभ दिया जाएगा।
क्यों नहीं मिल रही जमीन
उन्नाव। योजना की लागत के अनुसार भूमि की खरीद व बैनामे के लिए शासन से एक लाख पचास हजार रुपए प्रति लाभार्थी मिलने है। मानक यह है जमीन मुख्य मार्ग पर होनी चाहिए। इसकी चौड़ाई 10 फिट व लंबाई 14 फिट होनी चाहिए। जानकारों की मानें तो जिले में जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं ऐसे में विभाग को कम बजट में जमीन मिलना टेढ़ी खीर नजर आ रहा है। विभागीय नियमों के अनुसार योजना शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के मोचियों के लिए है। शर्त यह है पात्र गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करता हो और बीपीएल श्रेणी का हो।