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Unnao News: एसडीओ, लिपिक व चार तकनीशियन पाए गए दोषी

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उन्नाव। उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में नियम विपरीत किए गए संशोधन की जांच पूरी हो गई है। जांच में एसडीओ, लिपिक व चार तकनीशियन (टीजी-2) दोषी पाए गए हैं। टीम ने रिपोर्ट अधीक्षण अभियंता को भेज दी है। मामले में सभी पर निलंबन व विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है।
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बंथर उपखंड कार्यालय से जुड़े इस मामले की जांच टीम में शामिल एक्सईएन द्वितीय भरत गौतम व अधिशाषी अभियंता टेस्ट एसके मिश्रा ने बिल से जुड़े अभिलेखों, ऑनलाइन किए गए संशोधन, विभागीय कर्मियों, उपभोक्ताओं व आरोपी चालक से पूछताछ के बाद फाइनल रिपोर्ट तैयार की है। विभागीय सूत्रों की माने तो जांच अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में एसडीओ, लिपिक के साथ चार टीजी-2 को भी दोषी माना है। अधिकारियों का कहना है कि बिल संशोधन की जो प्रक्रिया होती है, उसमें शुरुआती दौर में टीजी-2 को जानकारी होती है। फिर लिपिक व उसके बाद आखिर में एसडीओ की आईडी पर जाता है।
ऐसे में ऐसा संभव ही नहीं है कि इतना बड़ा खेल हो गया और किसी को जानकारी तक नहीं हुई। इसी आधार पर तीनों को दोषी मानते हुए रिपोर्ट अधीक्षण अभियंता को भेजी गई है। विभागीय जानकार बताते हैं कि टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर सभी विभागीय कर्मियों का निलंबन सहित अन्य विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। एक्सईएन द्वितीय भरत गौतम ने बताया कि फाइनल जांच रिपोर्ट संयुक्त हस्ताक्षर से अधीक्षण अभियंता को भेज दी गई है।
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यह है मामला
बंथर एसडीओ अरविंद कुमार ने साइबर थाने में सिविल लाइन बंधूहार निवासी निजी चालक आशीष कुमार सहित एक अन्य अज्ञात पर सीसीबी (समायोजन उपभोक्ता अंशदान) आईडी को हैक करके 10 बिलों में संशोधन के जरिए 18.73 लाख का सरकारी राजस्व का चूना कराने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। अधीक्षण अभियंता ने टीम गठित करके जांच कराई।


एसडीओ ने रखा था निजी चालक, साइबर पुलिस कर रही जांच
एसडीओ ने जिस आशीष कुमार पर आईडी हैक करने की रिपोर्ट दर्ज कराई है, वह उनका निजी चालक था। ऐसे में अधिकारियों ने जो जांच की है, उसमें अपने विभाग के ही कर्मियों को दोषी पाते हुए रिपोर्ट दी है। अधिकारियों का कहना है कि निजी चालक पर उनके स्तर से कोई कार्रवाई नहीं बनती है। मामले में साइबर पुलिस जांच कर रही है। ऐसे में यदि दोष सिद्ध होता है तो पुलिस ही आगे की कार्रवाई करेगी।
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