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एसडीएम की गाड़ी लेकर सीएचसी पहुंची एएनएम

Wed, 21 Sep 2016 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
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एएनएम से बात करते प्रभारी चिकित्साधिकारी। - फोटो : अमर उजाला
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करीब छह माह से अनुपस्थित चल रही एएनएम सुषमा गौतम मंगलवार को नीली बत्ती लगी गाड़ी और दो गार्ड के सात सीएचसी पहुंची। गाड़ी पर एएनएम लिखा था। इस दौरान सीएचसी में हलचल मच गई। एएनएम ने रौब गांठते हुए हाजिरी भरने की कोशिश की, लेकिन प्रभारी ने हस्ताक्षर नहीं करने दिया। सीएमओ का कहना है कि वेतन रोक दिया गया है और प्रकरण से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।  
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सफीपुर से जुड़े ग्राम कुसैला में एएनएम पद पर सुषमा गौतम तैनात हैँ। वह करीब छह माह से अनुपस्थित चल रही हैं। इन दिनों अस्पतालों में मानव संपदा संसाधन प्रबंधन प्रणाली के लिए कर्मचारियों के फार्म भराए जा रहे हैं। इसकी जानकारी मिलने पर वह मंगलवार को नीली बत्ती लगी गाड़ी से सीएचसी पहुंची। गाड़ी पर एसडीएम लिखा था और गाड़ी का नंबर यूपी 65 एजी 738 था। साथ में दो गार्ड भी थे। नीली बत्ती लगी गाड़ी के सीएचसी पहुंचते ही हलचल मच गई। पहले तो कर्मचारियों ने समझा कि कोई अधिकारी जांच के लिए आया है।

बाद में पता चला कि यह तो एएनएम सुषमा हैं तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। एएनएम सुषमा  वरिष्ठ लिपिक हसनैन के कमरे में पहुंची और उनसे फार्म भरवाने की बात कही। साथ आए गार्डों ने भी रौब गांठा। वरिष्ठ लिपिक ने सुषमा को प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. राजेश वर्मा से बात करने की सलाह दी। इसके बाद वह नर्स प्रभारी के कमरे में पहुंचकर उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास करने लगीं। उसके गार्ड यहां भी रौब गांठने में पीछे नहीं रहे। प्रभारी ने रोक दिया। रजिस्टर चेक किया तो पता चला कि सुषमा पिछले छह माह से केंद्र नर्हीं आइं हैं। इसके बाद उन्होंने इसकी रिपोर्ट सीएमओ को भेजने की बात कही। उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर करने की इजाजत नहीं मिलने पर गुस्साई एएनएम ने अपना फार्म भरा और सीएचसी से चली गईं।
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2006 में हुई थी तैनाती
सुषमा की एएनएम पद पर नियुक्ति वर्ष 2006 में हुई थी। बताया जाता है कि उनके पति एसडीएम हैं। दूसरे कर्मचारियों की मानें तो सुषमा ने कभी लगातार ड्यूटी नहीं की। इतना ही नहीं विभाग की ओर से उसके खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं की गई। एएनएम अभिलेखों में फ रवरी 2016 से ही अनुपस्थित चल रही है। अप्रैल से बिलकुल नहीं आने और किसी भी प्रकार के लक्ष्य की पूर्ति नहीं करने पर पूर्व प्रभारी डा. अजीत कुमार सिंह ने इसका वेतन रोकने की संस्तुति भी की थी। इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भी भेजा गया। इस बीच कुसैला क्षेत्र की एचवी अशोक कुमारी ने कई बार दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया तब भी एएनएम ने उससे बात नहीं कीं। वहीं जब कर्मचारी डाटा फ ीडिंग फार्म भरे जाने की सूचना मिली तो नौकरी दांव पर लगी देख मंगलवार को वह स्वास्थ्य केंद्र पहुंची।
 
छह माह से जारी नहीं हुआ है वेतन
छह माह से अनुपस्थित चल रही एएनएम का वेतन जारी नहीं किया गया है। चूंकि फार्म सबको भरवाना है, इसलिए उसने मंगलवार को केंद्र पर आकर फार्म भरा है। इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी जा रही है। वहां से मिले निर्देशों के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डा. बीएन श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्साधिकारी उन्नाव।
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आखिर कैसे प्रयोग किया सरकारी गाड़ी
एआरटीओ माला बाजपेयी ने बताया कि अगर सरकारी गाड़ी में संबंधित अधिकारी नहीं बैठा है तो नियमानुसार नीली बत्ती को ढकना जरूरी है। ऐसा न होने पर एमवीएक्ट के तहत वाहन का चालान करने की कार्रवाई हो सकती है। अगर एसडीएम ने अपनी गाड़ी परिवार के किसी सदस्य को आवश्यक कार्य से गाड़ी दी है तो इसके लिए उन्हें अनुमति लेनी पड़ती है। लेकिन उस स्थिति में भी नीली बत्ती को ढकना जरूरी है।
सीओ रामअर्ज ने बताया कि शासनादेश है कि अगर कोई अधिकारी अपने पत्नी या बच्चे को शहर में आसपास कहीं जरूरी काम से सरकारी गाड़ी से भेजता है तो इसके लिए उन्हें अनुमति लेनी होगी और निर्धारित शुल्क जमा करना होगा। उन्होंने बताया कि लेकिन सरकारी गाड़ी को गैर जनपद नहीं भेजा सकता। इसके लिए संबंधित अधिकारी को उच्चाधिकारी को जवाब देना होगा और उच्चाधिकारी प्रशासनिक नियमावली के तहत दोष के अनुसार दंडित भी कर सकते हैं।
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