पुरवा। महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की कर्मस्थली गढ़ाकोला रही है। बीघापुर रेलवे स्टेशन से गढ़ाकोला जाने वाली सड़क पर आगे बढ़ते हुए जब गांव के थोड़ा नजदीक पहुंचे तो एक चबूतरे पर कुछ बुजुर्ग बातचीत करते मिले। पंचायत चुनाव का जिक्र करते ही बुजुर्गों के चेहरे के भाव बदल गए। बोले, चुनाव तो हर पांच साल में आते हैं लेकिन विकास देखने की आस में आंखें पथरा गई हैं। गांव के लोगों को शुद्ध पानी तक उपलब्ध नहीं हो सका है। निराला के प्रतिमा स्थल का चबूतरा भी क्षतिग्रस्त हो चुका है।
पुरवा विकासखंड की ग्राम पंचायत भाटमऊ है। इसके राजस्व गांव जाजनपुर व गढ़ाकोला हैं। बुजुर्गों ने कहा कि यह बड़ी विडंबना है कि जिस कवि का नाम विश्वस्तर पर आदर से लिया जाता है उसकी कर्मस्थली उपेक्षा का शिकार है। गांव के लोग फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं। गांव में पीएचसी तो है लेकिन डॉक्टर एक साल से नहीं है। जांच होती नहीं है क्योंकि लैब सहायक पुरवा सीएचसी में संबद्ध है। गांव की गलियां व नालियां टूटी हैं। सफाई व्यवस्था ध्वस्त है। छुट्टा मवेशियों की गंभीर समस्या है। निरालाजी की प्रतिमा तक जाने वाला सीसी रोड भी जर्जर हालत में है। (संवाद)