पुरवा। कोतवाली क्षेत्र के गांव बस्तीखेड़ा में विवादित भूमि पर शव दफनाने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। तहसीलदार कोतवाली पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने दोनों पक्षों से वार्ता की और सहमति के बाद शव दफन कराकर मामला शांत कराया।
शुक्रवार को बस्तीखेड़ा निवासी अलोपी की बीमारी से मौत हो गई थी। परिजन गांव में स्थित विवादित भूमि पर शव दफनाने पहुंचे। गड्ढा खोदने की शुरुआत होते ही दूसरे पक्ष से रामशंकर, जयकरन, सुशील पहुंच गए और बैनामे के आधार पर भूमि अपनी व सिविल कोर्ट में वाद दायर होने की बात कहकर शव दफन कराने से मना कर दिया। इस पर दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी। जानकारी पर एसडीएम राजेश चौरसिया ने तहसीलदार नरेंद्र यादव को मौके पर भेजा। तहसीलदार व कोतवाल अजय त्रिपाठी ने गांव पहुंचकर दोनों पक्षों से वार्ता शुरू की। इसमें अनुसूचित जाति के मृतक अलोपी की पत्नी श्रीमती ने वर्षो से कब्जे के आधार पर अपनी भूमि बताया। वहीं दूसरे पक्ष ने भी इसमें ग्राम समाज की भूमि होने का दावा कर मामला कोर्ट में होने की जानकारी दी। प्रशासन ने दोनों पक्षों से वार्ता कर ग्राम समाज की भूमि को छोड़कर दूसरे जमीन के एक कोने में दो मीटर की परिधि में गड्ढा खुदवा कर शव दफन करा दिया। एसडीएम राजेश चौरसिया ने बताया यह भूमि भूमिधरी व ग्राम समाज की है। दोनों पक्षों की सहमति के बाद ग्राम समाज की भूमि में एक कोने में शव दफन कराया गया है। इसमें किसी का अधिकार नहीं रहेगा।