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तत्कालीन बीएसए व एजेंसी पर गबन की रिपोर्ट दर्ज

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उन्नाव। परिषदीय स्कूलों के रखरखाव, स्टेशनरी व खेलकूद सामग्री की खरीद के लिए शासन से भेजी गई 9.73 करोड़ की कंपोजिट ग्रांट के खर्च में करोड़ों की गड़बड़ी सामने आने के बाद देर रात तत्कालीन बीएसए व जौनपुर जिले की एजेंसी व अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मंगलवार को बीएसए कार्यालय में प्रभारी बीएसए व वित्त एवं लेखाधिकारी फाइलों की छानबीन में जुटे रहे।
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जिले के 2305 प्राथमिक व 832 जूनियर विद्यालयों में शिक्षण व खेलकूद, स्वच्छता और स्कूलों के रखरखाव के लिए शासन से कंपोजिट ग्रांट के तहत 9.73 करोड़ रुपये जारी हुए थे। छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों को धन आवंटित किया गया था। फार्मों के माध्यम से स्कूल में भेजे गए कुर्सी मेज, टाट पट्टी, शिलापट, चाक, बाल्टी, एमडीएम के बर्तन व खेल किट में बड़े पैमाने पर घालमेल की बात सामने आई थी। सपा एमएलसी सुनील सिंह साजन ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल से शिकायत की थी।
शासन स्तर से 25 सितंबर को राज्य परियोजना निदेशक बेसिक शिक्षा विजय किरन आनंद ने मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण के उपनिदेशक उदयभान, सर्वशिक्षा के अवर अभियंता सरोजानंद व मनीष मिश्रा की टीम बनाकर नवाबगंज ब्लाक के जंसार, बरुआ, बिछिया ब्लाक के बशीरतगंज, सरांय कटियान व हुसैन नगर, हसनगंज ब्लाक के हाजीपुर बबरी, फतेहपुर चौरासी ब्लाक के ईश्वरीखेड़ा, और मियागंज ब्लाक के हैदराबाद परिषदीय स्कूल की जांच की थी। जांच में सामने आया कि ग्रांट को खर्च करने के लिए जिला स्तर पर मनमाने तरीके से दूसरी सूची बनाकर मनमाने और कई गुना महंगे दामों पर खरीदारी दर्शाकर शासकीय धन के गबन रिपोर्ट आने के बाद निदेशक के निर्देश पर प्रभारी बीएसए/जिला विद्यालय निरीक्षक राकेश कुमार ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। कोतवाली प्रभारी दिनेश चंद्र मिश्रा ने बताया कि तत्कालीन बीएस बीके शर्मा और जौनपुर जिले ओलेदगंजन चंदेल कांप्लेक्स स्थित मेसर्स मां वैष्णो एजेंसी के खिलाफ धारा 409 के तहत लोक सेवक द्वारा शासकीय संपत्ति के गबन का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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जांच में ये मिलीं कमियां
-खरीदी जाने वाली सामग्री, स्कूल में कराए जाने वाले कामों की सूची, विवरण के अनुसार खर्च करनी थी। लेकिन विवरण से हटकर जिले स्तर पर एक अन्य सूची जारी की गई। जिसमें 17 के स्थान पर 10 क्रम ही दिए गए थे।
-क्रय की गई सामग्री के बिल वाउचर में जौनपुर की फर्म मेसर्स मां वैष्णो से ही अधिकतर सामग्री की सप्लाई ली गई।
-स्कूलों में मिली सामग्री बाजार दर से अधिक दर पर खरीदी गई थी।
- बिल बाउचर हाथ से लिखे गए थे। जिसमें जीएसटी का उल्लेख नहीं था।
- प्रधान शिक्षकों से बातचीत पर पता चला कि बीईओ ने एक ही फर्म से अधिक खरीदारी का दबाव बनाया।
- कंपोजिट ग्रांट की धनराशि से स्कूलों में क्रय की जाने वाली सामग्री की सूची जो राज्य परियोजना कार्यालय से जारी की गई थी। उसे डीएम व बीएसए के संयुक्त हस्ताक्षर से बदलना पाया गया।
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