उन्नाव। बिछिया के कोरारीकला में लाखों के गबन मामले में मुकदमा दर्ज कराने के बाद अब जिम्मेदारों से सरकारी धनराशि की रिकवरी कराने की भी कार्यवाही शुरू करा दी गई है। इसके साथ ही जिम्मेदारों को दोहरा झटका देते हुए सात कार्यों को श्रमदान घोषित करा दिया है।
24 दिसंबर को कोरारीकला के बीडीसी राजकुमार व राम सिंह ने सीडीओ को शिकायतीपत्र देकर लाखों रुपये के गड़बड़झाले की आशंका जताई थी। सीडीओ ने 27 दिसंबर को गांव जाकर पड़ताल की थी। मौके पर कोरारीकला के मजरे भवानीखेड़ा के एक ही परिसर में संचालित उच्च व प्राथमिक विद्यालय में हो रहे निर्माण कार्यों के साथ ही पंचायत भवन व इंटरलॉकिंग, नाली निर्माण में लाखों की गड़बड़ी मिली थी।
जांच में यह भी पता चला था कि गांव में कुल सात कार्यों के नाम पर 18 दिसंबर को 20.38 लाख रुपये निकाले गए। प्रधान पुत्र निशांत कुमार द्वारा अनियमित तरीके से 4.06 लाख रुपये निकाला जाना भी शामिल है। सीडीओ नेे निर्देश पर 28 दिसंबर को बिछिया के एडीओ पंचायत अनिल कुमार ने अचलगंज थाने में प्रधान वरुणा देवी, सचिव अभिषेक वर्मा और प्रधान पुत्र निशांत कुमार पर सरकारी धनराशि गबन की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सीडीओ ने 20.38 लाख रुपये की रिकवरी प्रधान, सचिव व प्रधान पुत्र से कराने के आदेश डीपीआरओ व बीडीओ बिछिया को दिए। गांव में कराए गए सभी कार्यों को श्रमदान घोषित कर दिया। निर्देश दिए कि श्रमदान घोषित होने के बाद जो भी सात कार्य गांव में कराए जा रहे हैं अब उनका सरकारी खाते से भुगतान नहीं होगा।
श्रमदान घोषित होने के बाद नहीं होगा भुगतान
पंचायतीराज विभाग के जानकारों के मुताबिक, श्रमदान घोषित कार्यों के सरकारी खाते से भुगतान न होने पर इसका वहन जिम्मेदारों को अपनी जेब से करना होगा। क्योंकि मौके पर काफी काम होते मिले। नियमानुसार, काम पूरा होने के बाद भुगतान निकाला जाना चाहिए था लेकिन जिम्मेदारों ने फर्जी ढंग से पैसा पहले ही निकाल दिया। जब शिकायत हुई तो उसके तुरंत बाद काम चालू करा दिया। इसलिए जिम्मेदारों पर दोहरी आर्थिक चोट लगी है।