उन्नाव। रहमत, बरकत और मग्फिरत का माहे रमजान अपने साथ अल्लाह की तमाम नेमतें लेकर आता है। अल्लाह रब्बुल इज्जत ने रोजेदार के लिए पंाच इनाम रखे हैं। कयामत के दिन रोजेदारों को जब ये इनाम मिलेंगे तो रोजा न रखने वाले अपने ऊपर अफसोस करेंगे कि काश हमने रोजा रखा होता। रोजे की अहमियत के बारे में ये बयान तालिब सरांय शाही मस्जिद के शहर काजी मौलाना निसार अहमद मिस्बाही ने दिया।
उन्होंने बताया कि साहबा एकराम हजरत अबू बक्र हुरैरा रजि. से रिवायत है कि अल्लाह ने रोजेदार के लिए पांच इनाम मख्सूस किए। पहला इनाम रोजेदार के मुंह से आने वाली बू अल्लाह को मुश्क (कस्तूरी) से भी प्यारी है। दूसरा इनाम है कि रोजेदार का रिज्क (भोजन) का जिम्मा खुद अल्लाह तआला अपने हाथ ले लेता है। उन्होंने कहा कि यही वजह है कि बंदे को रमजान मुबारक में जो कुछ खाने को मिलता है वह साल भर में शायद कुछ खास मौकों पर ही मिले। तीसरे इनाम में इस माह अल्लाह शैतान को कैद कर देता है।
यही कारण है कि इस माह मेें बंदा अपनी बुराईयां छोड़कर सिर्फ अल्लाह की इबादत में लग जाता है। चौथा इनाम यह है कि रोजेदार की बेहतरी के हक में मछलियां दुआ करती हैं। बताया कि अगर कोई मख्लूक (सृष्टि की कोई भी रचना) बंदे के लिए दुआ करता है तो अल्लाह उस बंदे के सैकड़ों गुनाह माफ कर देता है।
दुनिया में अनगिनत मछलियां हैं अल्लाह इन मछलियों को अपने रोजेदार बंदे के हक में दुआ के लिए तैनात कर देता है। एक की दुआ से सैकड़ों नेमतें मिलती हैं तो अनगिनत मछलियों की दुआओं का बदला बंदे की सोच के बाहर की बात है। इसका अज्र सिर्फ अल्लाह ही जानता है।
बताया कि पांचवां इनाम सबसे अहम है अल्लाह अपने रोजेदार बंदे के लिए जन्नत को आरास्ता (सजावट) करता है। कयामत (निर्णायक दिन) के दिन यही रोजे और कलामे पाक बंदे की हिफाजत करेंगे और अल्लाह जल्ले जलालहू की बारगाह में बंदे के हक में गवाही देंगे। उन्होंने सभी लोगों से रोजा और नमाज पाबंदी से अदा करने की अपील करते हुए कहा कि ऐसा करने से अल्लाह की नेमतों के साथ इन पांच मख्सूस इनाम के हकदार बनें।