मानसून की बेरुखी और सिस्टम की मार से अन्नदाता बेहाल है। दो माह में सामान्य से भी कम बारिश होने व नहरें सूखी रहने से धान किसानों को फसल बचाने के लिए खासी जद्दोजहद करनी पड़ रही है। बड़े काश्तकार तो निजी संसाधनों से अपनी उपज बचा लेते हैं, लेकिन छोटे व बंटाई पर खेत ले रखे किसान परेशान हैं।
कृषि विभाग ने इस बार अच्छी बारिश की संभावना को देखते हुए धान बुआई का क्षेत्रफल 88914 हेक्टेअर में तय किया। लक्ष्य के सापेक्ष शत-प्रतिशत धान बीज की बुआई भी हुई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान की फसल के लिए सबसे ज्यादा पानी की आवश्यकता होती है। खेतों में पर्याप्त नमी नहीं रहेगी तो पैदावार घटेगी। पिछले माह के शुरुआत में तो रुक-रुककर हुई बारिश धान फसल के लिए फायदेमंद साबित हुई। अगस्त के अंतिम दिनों और सितंबर के शुरुआती दौर में बारिश थम गई है। जुलाई में जहां औसत बारिश 262.8 मिलीमीटर होनी चाहिए, इस बार मात्र 213.5 मिमी. ही हुई। अगस्त में तो स्थिति और खराब रही। कृषि विभाग इस माह 246.3 मिमी. बारिश को सामान्य मानता है लेकिन इस बार बारिश का आंकड़ा 200 तक नहीं पहुंच पाया है। पर्याप्त बारिश न होने से किसानों को जहां तगड़ा झटका लगा वहीं सिस्टम ने भी उन्हें रुलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। शासन-प्रशासन की उदासीनता से नहरें पूरी तरह से सूखी पड़ी हुई हैं।
एक दशक से शारदा नहर में पानी नहीं
बीघापुर परिक्षेत्र में पिछले एक दशक से शारदा नहर से किसानों को पानी नहीं मिला है। पहाड़पुर से लेकर टेढ़ा तक 20 किमी. में नहर के तली में भी 10 वर्षों से पानी नहीं आया। पहाड़पुर, दुबेपुर, महाई, हिंदपालखेड़ा, कुलहा, पाही, अमरपुर, जगदीशपुर, बगहा कभी धान की बेल्ट थी लेकिन पानी के अभाव में अब मात्र 20 प्रतिशत भूभाग पर ही धान की रोपाई हो पाती है। कुलहा, बीघापुर, घाटमपुर, आड़ाखेड़ा, पाली, नरोत्तमपुर, भीखखेड़ा, पंचमखेड़ा, रग्घूखेड़ा, टेढ़ा सहित आधा सैकड़ा गांवों के हजारों किसान खेती से मुंह मोड़ चुके हैं।
मौरावां-आसीवन ब्रांच में दो साल से पानी नहीं
नवाबगंज विकासखंड क्षेत्र से निकली 30 किमी. लंबी मौरावां-आसीवन ब्रांच में पिछले दो साल से पानी नहीं आया है। इससे सिंचित सैकड़ों बीघे खेती प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने कई बार संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी भी दी लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
तेज धूप में अन्य फसलों पर भी संकट
असोहा-मौरावां नहर और पुरवा ब्रांच से निकली बैगांव व लंगरपुर-ऊंचगांव माइनर में धूल उड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस नहर में सालों से पानी नहीं आया है। संपन्न किसान तो किसी तरह से अन्य साधनों से सिंचाई करके फसलों को बचाने की कोशिश में जुटे हुए हैं लेकिन गरीब अन्नदाता प्रकृति और सिस्टम के भरोसे ही बैठा हुआ है। वहीं जानकार कम बारिश से धान का उत्पादन गिरने की संभावना जताने लगे हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों की मानें तो यदि इसी प्रकार तेज धूप निकली तो अन्य फसलों जैसे मक्का, मूंग, उरद, मूंगफली आदि को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
नहरों की सफाई के लिए भेजा गया है पत्र
हां, यह सही है कि पर्याप्त बारिश न होने से किसान परेशान हैं। जिला प्रशासन को किसानों की चिंता है। टेल तक पानी पहुंचाने के लिए पहले नहरों की सफाई कराई जाएगी। इसके लिए प्रमुख सचिव को पत्र भेजा गया है। वैसे नहरों में पानी न होने पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों को बुलाकर जानकारी लूंगा। यदि संभव होगा तो नहरों में पानी छुड़वाया जाएगा। सुरेंद्र सिंह, जिलाधिकारी उन्नाव।
38 नलकूप चेक किए 17 बंद मिले
उन्नाव। फसलों की सिंचाई की समस्या को देख्रते हुए डीएम सुरेंद्र सिंह ने अधिशाषी अभियंता व उनकी टीम को सरकारी नलकूपों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। टीम ने कुल 38 ट्यूबवेल चेक किए जिनमें से बिजली, पंप मोटर खराब होने या अन्य खामियों के चलते 17 ट्यूबवेल बंद मिले। डीएम ने एक्सईएन को चेतावनी देते हुए एक सप्ताह में सभी नलकूपों को सही कराने के निर्देश दिए हैं। डीएम ने चेतावनी दी कि अगर इस समयावधि में ट्यूबवेल ठीक न हुए तो कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी जाएगी।