उन्नाव/बीघापुर। अपग्रेड की जा रही डलमऊ पंप कैनाल की लागत 15 साल में 46.62 करोड़ बढ़ गई लेकिन 40 हजार किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। सांसद की शिकायत पर जांच में गड़बड़ी भी मिली। आईटीआई से जांच कराई गई लेकिन रिपोर्ट दबा दी गई। डीएम ने इस पर नाराजगी जताते हुए सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
बीघापुर तहसील के डौंडिया खेड़ा में 198 किलोमीटर लंबी चौधरी चरण सिंह डलमऊ-बी पंप नहर परियोजना का निर्माण वर्ष 2010 में शुरू हुआ था। तब इसकी अनुमानित लागत 29.38 करोड़ थी। काम समय पर पूरा न होने से लागत 76 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। पुल पुलियों के निर्माण के साथ ही पंप हाउस, भवन का निर्माण, बिजली और यांत्रिक कार्य कराए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को निर्माण की जिम्मेदारी मिली है। इस पंप कैनाल से उन्नाव और रायबरेली जिले के करीब 40,000 किसानों को सिंचाई के लिए प्रतिदिन 300 क्यूसेक पानी मिलना है। काम मार्च-2025 तक पूरा करने के लिए अंतिम समय सीमा निर्धारित की गई थी लेकिन यह समय भी बीते तीन महीने हो चुके हैं।
निर्माण मानकों की अनदेखी से जुड़ी शिकायतों पर सांसद साक्षी महाराज ने अक्तूबर 2024 में डीएम को पत्र भेजकर पंप कैनाल की गुणवत्ता जांचने के लिए कहा था। एक फरवरी 2025 को तत्कालीन सीडीओ प्रेम प्रकाश मीणा ने तीन सदस्यीय तकनीकी टीम के साथ जांच की थी। कई जगह फर्श धंसी मिली थी। दीवार, छत भी मानक अनुरूप नहीं थी। तकनीकी टीम को पंप कूप, लिंटर, हाइड्रोलिक पंप का वजन मानक के अनुसार नहीं मिला था। पता चला था कि निर्माण एजेंसी यूपीपीसीएल ने आईटीआई के बजाए एचबीटीयू कानपुर से तकनीकी जांच की रिपोर्ट लगाई है।
तत्कालीन सीडीओ ने शासनादेश का उल्लंघन मिलने पर नाराजगी जताई थी और आईआईटी कानपुर से सिविल वर्क, पंप, पाइप लाइन और पूरे हाइड्रोलिक सिस्टम की जांच के निर्देश दिए थे। सूत्रों के अनुसार, आईटीआई ने दो महीने पहले जांच रिपोर्ट दे दी है, लेकिन तत्कालीन सीडीओ का तबादला होने से विकास विभाग के अधिकारी जांच रिपोर्ट दबाए हैं।
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साल दर साल बढ़ती गई लागत
बीघापुर तहसील क्षेत्र में किसानों को सिंचाई सुविधा के लिए वर्ष 1985-86 में डलमऊ पंप नहर परियोजना स्थापित की गई थी। इसके जरिए गंगा नदी के पानी को पंप के जरिए नहर के माध्यम से खेतों तक पहुंचाया गया था। 300 क्यूसेक क्षमता की नहर मोटर वोट में सात पंप लगाए गए थे। परियोजना की समय सीमा 15 वर्ष की थी लेकिन परियोजना 25 साल तक चल गई तो वर्ष 2010 में शासन ने 29.38 करोड़ रुपये जारी करके स्थायी पंप नहर बनाने की स्वीकृति दी। काम 18 सितंबर 2014 तक पूरा होना था लेकिन देर होने से परियोजना की लागत बढ़ गई। वर्ष 2018 में शारदा नहर उन्नाव खंड परियोजना व्यय वित्त समिति बैठक में 76 करोड़ का संशोधित प्रस्ताव रखा गया। वर्ष 2023 में बजट मिलने पर काम शुरू हुआ। इसे वर्ष 2025 तक पूरा होना था जो अभी तक पूरा नहीं हुआ।
कोट
आईटीआई की जांच रिपोर्ट कहां है और उन्हें क्यों नहीं दी गई, इसकी जानकारी करेंगे। रिपोर्ट तलब करके पाई गईं कमियों को लेकर संबंधित इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- गौरांग राठी, डीएम
पंप नहर का काम लगभग पूरा हो चुका है। 60-60 क्यूसेक क्षमता के छह मोटर पंप लगाए गए हैं। पांच नियमित चलेंगे और एक अतिरिक्त रहेगा। पांच पंप से 300 क्यूसेक पानी की आपूर्ति होगी। जुलाई में सिंचाई जलापूर्ति का प्रयास है।
- धीरेंद्र यादव, जेई नहर विभाग