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जनादेश बयां कर रहा जनता का विश्वास

Sat, 11 Mar 2017 11:56 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
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जीत के बाद पंकज गुप्ता की मुह मीठा कराते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
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2017 के चुनाव में जनता के मिले जनादेश से भाजपाइयों का विश्वास चरम पर पहुंच गया है। चुनाव के ठीक 15 दिन पहले भाजपा ने मोहान से शिक्षक बृजेश रावत को प्रत्याशी घोषित किया। बृजेश ने दो बार से बसपा के सिटिंग विधायक राधेलाल रावत को 54095 मतों से हराकर जिले में सबसे बड़ी जीत दर्ज कर हीरो बन गए। वहीं दूसरी बड़ी जीत के नायक भाजपा के कद्दावर नेता व भगवंतनगर से ह्दयनारायण दीक्षित बने। जिन्होंने बसपा प्रत्याशी को 53366 मतों से धूल चटा दी।

सदर विधायक पंकज गुप्ता ने सपा प्रत्याशी को 46072 मतों से पराजित कर तीसरी बड़ी जीत दर्ज की। चौथी बार बांगरमऊ से विधायक बने कुलदीप सिंह सेंगर ने सपा प्रत्याशी को 28046 मतों से हराकर चौथी बड़ी जीत अपने नाम करने में सफल रहे। सफीपुर से विधायक चुने गए बंबालाल दिवाकर 27,236 मतों के साथ पांचवें नंबर पर रहें तो वहीं पुरवा में 26,843 मतों से भाजपा प्रत्याशी को हराने वाले अनिल सिंह का जिले में जीत का अंतर सबसे कम रहा।
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ह्रदयनारायण पांचवीं बार तो कुलदीप चौथी बार बने विधायक
उन्नाव। पुरवा से 1985 में निर्दलीय चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने ह्रदयनारायण दीक्षित को जनता ने लगातार चार बार अपना नेता चुन विधानसभा पहुंचाया। इस दौरान 1989 में जनता दल, 1991 में जनता पार्टी वहीं 1993 में सपा की साइकिल में सवार होकर विधानसभा का सफर तय करने में सफल रहे थे। 1996 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़े उदयराज यादव ने ह्रदयनारायण दीक्षित को हराकर पांचवी जीत दर्ज नहीं करने दी। 2017 के चुनाव में पुरवा छोड़ भगवंतनगर सीट से ह्रदयनारायण दीक्षित भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े।

और जनता ने पांचवी बार विधायक चुन लिया। वहीं सपा का दामन छोड़ भाजपाई हुए विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने बांगरमऊ से भाग्य अजमाया। कुलदीप सिंह सेंगर को बांगरमऊ की जनता ने स्वीकार कर लगातार चौथी बार विधायक चुना। बतातें चलें कि कुलदीप सिंह सेंगर ने 2007 के चुनाव में सपा के टिकट पर बांगरमऊ से विधायक चुने जा चुके हैं। इस तरह 2017 में बांगरमऊ से दोबारा विधायक बने हैं।


उदयराज के विकास पर भारी पड़ा अनिल का विश्वास  
उन्नाव। 1996 से 2012 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर चार बार पुरवा से विधायक बने उदयराज यादव इस बार जीत की लय बरकरार नहीं रख सके।मुलायम सिंह के करीबियों में शुमार कद्दावर नेता को जिले में मिनी मुलायम सिंह भी कहा जाता है। क्षेत्र के विकास के मामले में भी कहीं पीछे नहीं रहे। 2017 के चुनाव में पूरे प्रदेश में भाजपा की आंधी रही लेकिन पुरवा में बसपा के अनिल सिंह ने विजय की पटकथा लिखी। जीत के बाद क्षेत्र की जनता में एक ही आवाज रही कि विकास पर अनिल सिंह का विश्वास भारी पड़ा।  


राज्यमंत्री भी न बचा सके अपनी सीट
उन्नाव। शहर के मोतीनगर निवासी सुधीर रावत 2007 में सफीपुर सुरक्षित सीट से सपा के टिकट पर पहली बार विधायक का चुनाव लड़े और जनता का विश्वास जीतने में सफल रहे। इसके पहले एक शिक्षक के रूप में पहचाने जाने वाले सुधीर रावत का हर दिन सपा संगठन व सरकार में रुतबा बढ़ता गया। जिसका नतीजा रहा कि लाख अटकलों के बाद भी 2012 के चुनाव में सपा ने एक बार फिर उन्हीं पर विश्वास कर सीट फतेह करने की जिम्मेदारी सौंपी।

इस बार भी जनता ने सुधीर को विधायक बनाया। साथ ही प्रदेश में पूर्ण बहुमत के साथ सपा ने सरकार बनाई तो सुधीर का कद और बढ़ गया। सरकार से नजदीकियों के चलते दो साल पहले मंत्रिमंडल विस्तार में सुधीर रावत को चिकित्सा, शिक्षा एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री बनाया गया। जो सपा के कई कद्दावर नेताओं को अखरा था। 2017 के चुनाव में मोदी लहर में सुधीर रावत को भी अपनी सीट गवानी पड़ी।

भाजपा की जीत में सोशल मीडिया भी अहम
उन्नाव। पीएम मोदी ने जिस तरह सोशल मीडिया को चुनाव प्रचार में प्रयोग किया शायद ही कोई दल उसके इर्द गिर्द भी भटक पाया हो। फेसबुक पेज, इंस्ट्राग्राम, वेबसाइट, व्हाट्सअप जैसे अन्य सोशल साइट्स पर पीएम मोदी का चेहरा व उनके वायदे ही छाए रहे। जिसकी कमान लखनऊ प्रदेश कार्यालय में बनाए गए हाईटेक सोशल मीडिया वार रूम से आईआईटियन की टीम संभाल रही थी।
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पीएम व सरकार के विकास की छोटी से छोटी गतिविधियों को धार देकर सोशलमीडिया में अपलोड कर धमाल मचाने वाली आईआईटियंस टीम ने भाजपा के प्रचंड बहुमत में बड़ा रोल अदा किया। सपा व कांग्रेस गठबंधन ने भी सोशल मीडिया का सहारा लिया लेकिन वो अंदाज नहीं दे पाए जो भाजपा के वार रूम से दिया जा रहा था।
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