उन्नाव। प्रदूषित उत्प्रवाह फैलाने पर तीन माह तक बंदी की मार झेलने वाले सीईटीपी (कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) को एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने अभी राहत नहीं दी है। एनजीटी के आदेश पर सीपीसीबी (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) और यूपीपीसीबी (उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) की संयुक्त टीम ने सीईटीपी का निरीक्षण किया। दस घंटे तक चली जांच में उन्होंने दस स्थानों से पानी का नमूना लिया। नमूने की जांच के बाद रिपोर्ट एनजीटी को सौंपी जाएगी। रिपोर्ट अधोमानक पाए जाने पर एनजीटी दोबारा सीईटीपी को बंद करने का निर्णय ले सकता है।
दही चौकी और बंथर स्थित सीईटीपी में प्रदूषित उत्प्रवाह मिलने पर जून 2019 में एनजीटी ने बंद करने के आदेश दिए थे। सीईटीपी बंद होने के साथ ही उससे जुड़ी 42 टेनरियों को भी बंद करा दिया गया था। एनजीटी के आदेश पर तीन करोड़ रुपये खर्च कर सीईटीपी में प्रदूषण की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक मशीनें लगवाई गई थी। इसके बाद सितंबर माह में प्रदूषण न फैलाने की शर्त पर सीईटीपी और टेनरियों को शुरू करने के आदेश दिए गए थे। एनजीटी ने सीपीसीबी को आदेश दिया था कि वह लगातार दो माह तक उत्प्रवाह पर नजर रखे। इस दौरान अगर प्रदूषण की मात्रा बढ़ी मिलती है तो कार्रवाई की जाए।
एनजीटी के आदेश पर टीम सीईटीपी दही चौकी और बंथर पहुंची थी। टीम ने सीईटीपी के इनलेट व आउटलेट से पानी का नमूना लेने के साथ कई स्थानों से भी नमूना लिया। नमूना लेने के बाद पानी के शुद्धीकरण की प्रक्रिया की जानकारी ली। टीम दस घंटे तक सीईटीपी में रही। सैंपल लेने के बाद टीम लखनऊ रवाना हो गई। बंथर सीईटीपी में जांच के दौरान सीपीसीबी से संजय कुमार, अंकित मिश्रा और यूपीपीसीबी से शिवबालक मौजूद रहे। टीम ने बताया कि लिए गए सैंपल की उच्च तरीके से जांच कराई जाएगी। जांच में बीओडी और क्रोम का स्तर जांचा जाएगा। तय मानक से अधिक क्रोम मिलता है तो दोबारा सीईटीपी पर कार्रवाई संभव है।