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तीन प्रत्याशी मैदान में, सपा का हंगामा

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उन्नाव। जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नामाकंन कराने वाले तीन प्रत्याशियों में से किसी ने भी अपना पर्चा वापस नहीं लिया। भाजपा और सपा प्रत्याशी के साथ भाजपा के बागी प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में डटे हैं। सभी जिला पंचायत सदस्यों को अपने पाले में लाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। तीनों प्रत्याशी अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
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शनिवार को हुए नामांकन में भाजपा से अधिकृत उम्मीदवार फतेहपुर चौरासी तृतीय से जिला पंचायत सदस्य शकुन सिंह ने दो सेटों में पर्चा दाखिल किया था। पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर प्रकरण में दुष्कर्म पीड़िता की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद भाजपा से टिकट कटने के बावजूद औरास द्वितीय से सदस्य अरुण सिंह ने नामांकन कराया था। बिछिया तृतीय से सदस्य निर्वाचित मालती रावत ने सपा से पर्चा भरा था। उसी दिन शाम को जांच में तीनों के नामाकंन वैध पाए गए थे। भाजपा के समर्थन से जिला पंचायत सदस्य पद का चुनाव जीतकर आए दो लोगों के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन कराने से पार्टी में गुटबाजी है। माना जा रहा था कि भाजपा के पदाधिकारी दोनों में से किसी एक का नामांकन वापस करा देंगे। सुबह 11 बजे से ही कलक्ट्रेट की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। डीएम रवींद्र कुमार खुद न्यायालय कक्ष संख्या तीन में मौजूद थे। तय समय दोपहर तीन बजे तक कोई भी प्रत्याशी पर्चा वापस लेने नहीं पहुंचा। 3:30 बजे प्रशासन ने अध्यक्ष चुनाव के लिए प्रत्याशियों की अंतिम सूची, उनके नाम व पता सहित नामाकंन कक्ष के बाहर चस्पा करा दी। इसमें शकुन सिंह, अरुण सिंह व मालती रावत को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार घोषित किया। निर्वाचन अधिकारी रवींद्र कुमार ने बताया कि तीन प्रत्याशी मैदान में हैं। मतदान 3 जुलाई को सुबह 11 से 3 बजे तक जिलाधिकारी न्यायालय कक्ष संख्या तीन में होगा। उसी दिन परिणाम घोषित किए जाएंगे।
पर्चा वापसी के अंतिम समय में सपाई कलक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान सपाइयों ने प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी करने में देरी और गेट के अंदर प्रवेश न देने पर हंगामा करते हुए नारेबाजी की। कुछ देर बाद डीएम निकले तो उनकी गाड़ी रोक ली। पुलिस ने सपाइयों को किनारे करके डीएम की गाड़ी निकलवाई।
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सपा अधिकृत उम्मीदवार मालती रावत के मंगलवार को भाजपा कार्यालय जाने पर उनके पार्टी की सदस्यता लेने की अफवाहों को बल मिला। उन्होंने माना कि वह बुलावे पर भाजपा प्रदेश कार्यालय गईं थीं। दावा किया कि भाजपा ने उन्हें पार्टी में शामिल होने और निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने का प्रलोभन दिया, लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हुईं। वहीं सपा जिलाध्यक्ष ने इसे पार्टी की कूटनीति का हिस्सा बताया।
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