उन्नाव। शकुन सिंह ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा की अधिकृत प्रत्याशी होंगी। शकुन के नामांकन की तैयारियां भी पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों ने शुरू कर दीं हैं। हालांकि अभी अरुण सिंह भी पीछे नहीं उठे हैं। टिकट कटने के बाद भी उन्होंने शुक्रवार को नामांकन पत्र खरीदे हैं।
भाजपा जिलाध्यक्ष राज किशोर रावत ने बुधवार रात औरास द्वितीय सीट से जिला पंचायत सदस्य अरुण सिंह का नाम अध्यक्ष पद के लिए घोषित किया था। इससे अरुण खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई थी। गुरुवार को दुष्कर्म पीड़िता ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को वीडियो भेजकर अरुण सिंह की प्रत्याशिता पर सवाल उठाए थे। इस पर भाजपा का प्रदेश नेतृत्व बैकफुट पर आ गया था। गुरुवार शाम चार बजे अरुण का टिकट काटकर फतेहपुर चौरासी तृतीय से सदस्य बनीं शकुन सिंह को अधिकृत उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। शाम छह बजे सोशल मीडिया पर टिकट होल्ड की चर्चाएं शुरू हो गईं। इन चर्चाओं पर पार्टी पदाधिकारी चुप्पी साध गए। देर रात तक कयासों का दौर चलता रहा। शनिवार को जिलाध्यक्ष ने शकुन सिंह को अधिकृत उम्मीदवार बताकर कई तरह की चर्चाओं पर विराम लगा दिया। उन्होंने कहा कि शकुन सिंह को ही पूरा संगठन एकजुट होकर चुनाव लड़ाएगा। शकुन सिंह का मुकाबला सपा समर्थित प्रत्याशी से होगा। सपा ने मालती रावत को प्रत्याशी बनाया है।
उधर, शुक्रवार को पांच जिला पंचायत सदस्यों ने नामांकन फार्म खरीदे। इसमें औरास द्वितीय सीट से जीते भाजपा के अरुण सिंह भी शामिल हैं। अरुण ने तीन सेट खरीदे हैं। फतेहपुर चौरासी तृतीय से जीतीं भाजपा की अधिकृत अध्यक्ष प्रत्याशी शकुन सिंह ने दो सेट खरीदे हैं। सपा की अधिकृत प्रत्याशी बिछिया तृतीय से जीतीं मालती रावत ने तीन, बिछिया द्वितीय से जीतीं सपा समर्थित उपासना यादव ने नामांकन पत्र का एक सेट लिया है। हसनगंज प्रथम से जीते इंद्रमोहन सिंह ने भी एक सेट खरीदा है। सहायक निर्वाचन अधिकारी डॉ. संजय द्विवेदी ने बताया कि शुक्रवार तक पांच सदस्यों ने अध्यक्ष पद के लिए पर्चा खरीदा है। शनिवार को भी पर्चे मिलेंगे।
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा दो धड़ों में बंट गई है। एक गुट अरुण सिंह तो दूसरा शकुन सिंह का समर्थन कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मतदान के ऐन पहले गुटबाजी भाजपा को भारी पड़ सकती है।
वैसे भी भाजपा के लिए अध्यक्ष का चुनाव जीतना चुनौती से कम नहीं है। कुल 51 जिला पंचायत सदस्य हैं। इसमें भाजपा समर्थित केवल नौ सदस्य ही जीते हैं। सपा समर्थित 19 और बसपा के तीन सदस्य हैं। 20 सदस्य निर्दलीय हैं। चुनाव जीतने के लिए कम से कम 26 सदस्य चाहिए। अपना अध्यक्ष बनाने के लिए भाजपा को 17 और सदस्यों का समर्थन जरूरी होगा। स्थानीय भाजपा के एक उच्च पदाधिकारी का कहना है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में सात दिन से भी कम समय बचा है। ऐसे में जिस प्रकार चुनाव से पहले दो धड़े बंट गए हैं, उससे तो पार्टी को नुकसान ही पहुंच सकता है। इसका फायदा विरोधी उठा सकते हैं।