उन्नाव। कृषि कानूनों के विरोध प्रदर्शन को छह माह पूरे होने पर किसान संगठनों द्वारा काला दिवस मनाने की आशंका से पुलिस और खुफिया अलर्ट रही। इस दौरान किसान नेताओं को घर से नहीं निकलने दिया गया। सभी को घर में ही नजरबंद किया गया। महिला किसान नेता ने घर से बाहर निकलकर काले झंडे लहराए। बाद में पुलिस ने उसे वापस लौटा दिया।
छह माह पहले कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों ने दिल्ली बार्डर पर प्रदर्शन शुरू किया था। विरोध प्रदर्शन को लंबा समय बीत जाने के बाद भी सरकार द्वारा कोई सुनवाई न किए जाने पर किसान संगठनों ने बुधवार को काला दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस पर पुलिस और खुफिया पहले से ही अलर्ट हो गई थी। पुलिस ने किसान नेताओं को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया था। हालांकि कुछ किसानों ने अपने घरों पर काले झंडे फहराए। शहर में महिला नेता गुड्डी रावत के प्रदर्शन की सूचना पर पुलिस सुबह ही उनके घर पहुंच गई। हालांकि इस बीच कुछ महिलाएं गुड्डी रावत के घर पर पहुंच गई और फिर एकजुट होकर काले झंडे हाथ में लेकर नारेबाजी करते हुए बाहर निकल आईं। यह देख पुलिस ने गली में कुछ दूर आगे चलते ही उन्हें रोक लिया और वापस लौटा दिया।
गंजमुरादाबाद के गांव हैबतपुर में भाकियू जिला महासचिव ठाकुर प्रसाद यादव, लहरापुर में तहसील अध्यक्ष रामसनेही यादव और गुलाबपुरवा में ब्लॉक अध्यक्ष रघुवीर यादव को पुलिस ने उनके ही घर में नजरबंद रखा। बीच में कुछ देर के लिए चौकी भी लाया गया। बाद में समझाकर घर भेज दिया गया। औरास में भाकियू (अराजनैतिक) के युवा तहसील अध्यक्ष डॉ. अतुल कुमार यादव को भी पुलिस घर में ही नजरबंद किए रही।
किसान कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा ने भी विरोध दर्ज कराया। संगठन के पदाधिकारियों ने गुरुद्वारे से पैदल मार्च निकाला और काले झंडे के साथ पैदल यात्रा करके कुछ देर के लिए बड़े चौराहे पर सांकेतिक धरने पर बैठे। फिर यहां से कलक्ट्रेट जाकर जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए किसान कानून वापस लेने की मांग की। ज्ञापन में कहा कि आंदोलन करते हुए छह माह हो गए पर सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी। ज्ञापन देने वालों में संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक बलविंदर सिंह, जसवंत सिंह, अखिल भारती किसान सभा के संयोजक संजय जयसवाल, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के राज्य काउंसिल सदस्य अखिलेश तिवारी, प्रगतिशील लेखक संघ के आलोक तिवारी शामिल रहे।