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सर्जन की मनमानी से आक्रोशित मरीजों ने किया हंगामा

Tue, 30 Aug 2016 11:03 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला, उन्नाव
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 जिला अस्पताल के डॉक्टरों का ‘देर से आना और जल्दी जाना’ कोई नई बात नहीं है। रोना तो इस बात का है कि यहां के डॉक्टर मरीजों को इलाज देने से भी पीछा छुड़ाने लगे हैं। कुछ डॉक्टरों को छोड़ अन्य सभी ने मनमाना रवैया अपना रखा है। जिला अस्पताल में एक ऐसे सर्जन भी है जो अक्सर विवादों में घिरे रहते है।
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 जिला अस्पताल पहुंचे कुछ मरीजों को सर्जन ने अस्पताल के कई चक्कर कटवाए। गंभीर हालत में बेटी का इलाज कराने पहुंचे एक शिक्षक यहां की व्यवस्था को कोस सिसक पड़े। आक्रोशित मरीजों ने तानाशाही रवैये को देख जमकर हंगामा किया और मनमानी की शिकायत स्वास्थ्य मंत्री से करने की घुड़की दी। हंगामा बढ़ता देख इमरजेंसी के डॉक्टर व स्टाफ ने उन्हें शांत कर इलाज मुहैया कराया।

छ: घंटे इलाज के लिए तड़पी महिला
शहर के मोहल्ला लोकनगर निवासी संजय की पत्नी अंजलि के पेट में पस बन गया। मंगलवार को वह अपने पिता कृष्णकुमार के साथ जिला अस्पताल पहुंची। यहां के फिजीशियन ने अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी।
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अल्ट्रासाउंड में पस की बात सामने आने पर उन्होंने सर्जन को दिखाने की सलाह दी। हाल के कई मामलों में विवाद से घिरे सर्जन के पास जब वह समस्या लेकर पहुंचा तो उन्होंने बिना अल्ट्रासाउंड देखे जांच कराने की बात कह पैथालॉजी भेज दिया। ब्लड टेस्ट के साथ अन्य कई जांचे करा वह दोबारा सर्जन के पास पहुंचा तो उन्होंने महिला को भर्ती करने की बात कह बिना किसी लिखापढ़ी के इमरजेंसी भेज दिया।

इमरजेंसी के डॉक्टर ने फिर उसे सर्जन के पास भेज दिया। दर्द से तड़प रही बेटी को देख पिता कृष्ण कुमार भड़क गए। उन्होंने इमरजेंसी में ही जमकर हंगामा किया। स्वास्थ्य मंत्री से शिकायत की घुड़की देने पर उनकी बेटी को भर्ती किया गया।

केस-2
शहर के मोहल्ला कल्याणी देवी निवासी सूर्यकांत तिवारी शहर के ही एक प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं। उनकी 12 वर्षीय बेटी सौम्या को तीन दिन से बुखार आ रहा था। सोमवार रात उसे झटके आने लगे। झटके आने से वह कई बार नीचे भी गिर गई। जिससे उसकी नाक व आंख के पास चोट आ गई। मंगलवार सुबह टीचर सूर्यकांत बेटी को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।

इमजेंसी के डॉक्टरों ने उसे भर्ती कर दिया। सूर्यकांत ने बताया कि दो बोतल ग्लूकोज के अलावा उसे कुछ नहीं दिया गया। उनका कहना है कि दर्द का इंजेक्शन लगवाने के लिए वह घंटो ओपीडी व इमरजेंसी में बैठे डॉक्टरों के चक्कर काटते रहे पर किसी ने एक न सुनी।

बेटी की हालत अधिक बिगड़ने पर उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्था पर आक्रोश जता बेटी के हाथ में लगा वीगो निकलवाया और प्राइवेट इलाज के लिए उसे लेकर अस्पताल से बाहर आ गए। बच्ची की दयनीय हालत देख अस्पताल के बाहर मौजूद लोगों ने टीचर से जानकारी ली तो आपबीती बता उनकी आंखे भर आई। सिस्टम को कोसते हुए वह बेटी को लेकर प्राइवेट इलाज को लेकर चले गए।
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 इंसेट
अभी ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। मामले की जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई की जाएगी।
                      सीएमएस डा. एसपी चौधरी
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