हास्य कलाकार राजू श्रीवास्तव अपने पूरे परिवार के साथ ननिहाल बेहटा ससान पहुंचे और अपनी मां सरस्वती की पहली पुण्यतिथि पर मां और पिता की प्रतिमा का अनावरण कराया।
अनावरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने कहा कि रमेशचन्द्र श्रीवास्तव ‘बलई काका’ की रग-रग में साहित्य बसा था। उनकी अंतिम सांस भी जिले के काव्य मंच पर ही टूटी।
साहित्य जगत में रमई काका, काका हाथरसी की परंपरा के कवि बलई काका के पुत्र राजू श्रीवास्तव ने अपने माता-पिता की प्रतिमा स्थापित कर एक पुनीत कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि प्रतिमा स्थल को सुरक्षित, संरक्षित व विकसित करने का कार्य जिस प्रकार राजू श्रीवास्तव चाहेंगे उस प्रकार मैं अपनी विधायक निधि से कराने का वचन देता हूं।
संचालन कर रहे रामू अवस्थी ने बलई काका की जन्मभूमि मगरायर में कवि सम्मेलन व उनकी गरिमा के अनुरूप स्मृतियों को संरक्षित करने की मांग की। इस पर विधायक ने कहा कि उनसे जो भी सहयोग बन पड़ेगा उसमें पीछे नहीं रहेंगे।
समारोह में राजू श्रीवास्तव ने बलई काका की जन्मभूमि में कवि सम्मेलन के आयोजन करने व उनकी स्मृति में कुछ और करने की बात कहते हुए अपनी विनोद पूर्ण शैली में अपने ननिहाल व पिता के गांव में बिताए हुए बचपन के पलों के संस्मरण सुनाए। कहा कि आज उनकी जो भी हैसियत है वह सब यहां के लोगों के आशीर्वाद से है।
समारोह में बलई काका के सभी छह पुत्रों ने क्षेत्रीय विधायक, सुनील अवस्थी ‘रामू’ व अपने रिश्तेदारों को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। काका के ज्येष्ठ पुत्र राजन श्रीवास्तव ने काव्य पाठ किया वहीं राजू से छोटे भाई हास्य कलाकार दीपू ने भी लोगों को अपने लतीफे व चुटकुलों से गुदगुदाया।
कार्यक्रम में बलई काका के सहपाठी जगदेव प्रसाद वर्मा, अरविन्द कुमार, नगरपंचायत अध्यक्ष उमानाथ धोबी लाला, सभासद राज पटेल, कुलदीप अग्निहोत्री, सुयष पाण्डेय, अनुज शाहू, लाला निर्भय सिंह, शिंपल मिश्रा, काजू श्रीवास्तव सहित गांव व आसपास के सैकड़ों गण्यमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता बलई काका के कवि पुत्र प्रेम प्रकाश श्रीवास्तव ने की।