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लाखों की धनराशि निकालने की जांच के आदेश

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उन्नाव। हसनगंज व सिकंदरपुर ब्लॉक के तीन पंचायत सचिवों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये निकालने के मामले की जांच के आदेश जारी किए गए हैं। हसनगंज मामले की जांच जहां एडीओ मुख्यालय को दी गई है। वहीं, करन ब्लॉक के सचिव की जांच वहीं के प्रभारी बीडीओ को देकर जल्द रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं।
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केस-1
अवकाश के बाद भी दो सचिवों ने किया था 23.5 लाख का भुगतान
हसनगंज ब्लॉक में तैनात ग्राम पंचायत अधिकारी रोहित राणा 30 जून व ग्राम विकास अधिकारी संजीव कुमार यादव 23 जून 2020 से चिकित्सीय अवकाश पर थे। इसके बाद भी भी दोनों ने आवंटित तीन, तीन ग्राम पंचायतों से 23.63 लाख रुपये निकाल करके कुछ निर्माण कार्यों का भुगतान कर दिया था। पंचायतीराज नियमों के तहत, किसी भी प्रकार के अर्जित अवकाश पर होने के बाद कर्मचारी विभागीय भुगतान आदि नहीं कर सकता है। एडीओ पंचायत रत्न कुमार की जांच में इसका खुलासा हुआ तो मुख्य विकास अधिकारी डॉ. राजेश कुमार प्रजापति ने डीपीआरओ को जांच कराने का आदेश दिया। डीपीआरओ राजेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि मामले की जांच सहायक विकास अधिकारी मुख्यालय को सौंपी गई है। ग्राम निधि खाते के अभिलेखों व बैंक स्टेटमेंट आदि की विस्तृत जांच करके 15 दिन में रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं।
केस-2
निलंबन के बाद सचिव ने निकाले 12 लाख, जांच के आदेश
ग्राम विकास अधिकारी अजीत सिंह के पास सिकंदरपुर करन की ग्राम पंचायत अचलगंज, मवइयामाफी, लखापुर, कर्मीबिजलामऊ व रिठनई का चार्ज था। 4 दिसंबर को उसे मवइयामाफी ग्राम पंचायत में निर्माण कार्यों में अनियमितता पर निलंबित कर दिया गया था। हालांकि इसके बाद भी उसने 5, 13 व 14 दिसंबर को आवंटित ग्राम पंचायतों के खातों से 12 लाख निकाल लिए लेकिन किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया। अब जिला विकास अधिकारी मनीष कुमार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने जांच प्रभारी बीडीओ चंद्रशेखर को दी है। डीडीओ ने बताया कि ग्राम निधि खातों के बैंक स्टेटमेंट से यह पता चल सकेगा कि किस तारीख को कितना पैसा निकाला गया। रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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