जिला अस्पताल में स्टैंड न होेने से खिड़की की कुंडी में लटकी ग्लूकोज की बोतल।
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जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार होता नहीं दिख रहा है। स्टैंड के अभाव में खिड़कियों की कुंडी में ग्लूकोज की बोतल लटकाकर चढ़ाया जा रहा है। वहीं डायरिया से पीड़ित आने वाले मरीजों के बेड पर चादर तक नहीं बिछाए जा रहे हैं।
जिला अस्पताल के वार्ड नंबर एक के बेड नंबर 34 पर भर्ती डायरिया पीड़ित सात माह की अंशिका पुत्री बेचू को ग्लूकोज लगना था। काफी समय तक तो स्टाफ ग्लूकोज की बोतल लटकाने के लिए ग्लूकोज खोजता रहा, जब स्टैंड नहीं मिला तो खिड़की की कुंडी से बोतल को लटकाकर ग्लूकोज चढ़ाया गया। वहीं इसी वार्ड में भर्ती सात माह की अंशू को बिना चादर बिछाए ही पलंग पर लिटा दिया गया।
यह हाल तब हैं, जब जिला अस्पताल का आए दिन आला अधिकारी निरीक्षण कर रहे हैं। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार होता नहीं दिख रहा है। अभी हाल में स्वास्थ्य विभाग की जेडी मिथलेश चतुर्वेदी ने जिला अस्पताल का निरीक्षण किया था और सख्त निर्देश दिए थे कि साफ-सफाई पर विशेष ध्यान रखा जाए। बेडों पर पड़े चादरों को रोजाना बदल कर धुले चादर बिछाए जाएं, उसके बाद भी सुधार नहीं हुआ।
कोट- जिला अस्पताल में स्टेंड व चादर दोनों हैं। मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण हो सकता है कि स्टैंड नहीं मिल पाया हो। चादर न बिछाना गलत है। इसके लिए व्यवस्था देख रहीं इंचार्ज से बात की जाएगी। व्यवस्थाओं में सुधार कराया जाएगा। डॉ. एसपी चौधरी, सीएमएस।