वन विभाग गंगा के किनारे बड़े पैमाने पर प्लांटेशन कराएगा। साथ ही गंगा कटरी में बेकार पड़ी अपनी जमीन पर कछुआ और घड़ियाल पालन के लिए तीन पालन केंद्र खोले जाएंगे। जलनिगम निर्माण शाखा के एक्सईएन मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि एनजीटी से प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है।
वन विभाग नदी किनारे करेगा पौधरोपण, कछुआ व मगरमच्छ पालन केंद्र बनेंगे
नमामि गंगे परियोजना के तहत कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। देर है तो सिर्फ बजट मिलने की बजट मिलते ही व्यापक स्तर पर काम कराए जाएंगे। परियोजना के तहत वन विभाग वित्तीय वर्ष 2017-18 में गंगा नदी के किनारे उन्नाव, बांगरमऊ और बीघापुर क्षेत्र में 77 लाख की लागत से 60 हेक्टेयर क्षेत्रफल में पौधरोपण कराया जाएगा। साथ ही किसानों को पौधरोपण के लिए प्रोत्साहित करने के साथ ही वन विभाग उन्हें नि:शुल्क पौैधे भी उपलब्ध कराएगा। यह पौधे ऐसे होंगे जो वहां की मिट्टी और पर्यावरण में सुरक्षित रहें और बढ़ सकें। किसान प्रोत्साहन पौध रोपण पर विभाग ने 43 हेक्टेयर क्षेत्रफल चिह्नित किया है। जिस पर 26 लाख रुपये खर्च होंगे। इसके साथ ही गंगा कटरी के मुख्य रास्तों के किनारे भी व्यापक स्तर पर पौधरोपण किया जाएगा और उन पौधों को सुरक्षित रखने के लिए ब्रिकगार्ड बनाने पर 3 करोड़ 87 लाख रुपये खर्च होंगे। यही नहीं वन विभाग उन्नाव, बीघापुर और बांगरमऊ में तीन कछुआ व मगरमच्छ पालन केंद्र भी स्थापित करेंगा। इनमें कछुओं और मगरमच्छों का पालन कर उन्हें गंगा नदी में छोड़ा जाएगा। विभाग का मानना है कि यह जलीय जीव गंगा को निर्मल बनाने में मदद करेंगे।
प्लान-2
3.80 अरब की लागत से बनेंगे नाले, सीवेज लाइन, ट्रीमेंट प्लांट
उन्नाव। नालों और ड्रेनों के माध्यम से गंगा नदी में गिर रहे शहरी आबादी और औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले गंदे पानी को गंगा में सीधे नहीं गिरने दिए जाएगा। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने शहर और शुक्लागंज के लिए 3.80 अरब की योजना को मंजूरी दी है। जल निगम निर्माण शाखा ने योजना खाका भी तैयार कर लिया है। बजट मिलते ही काम शुरू हो जाएगा। योजना के तहत शहर और शुक्लागंज के आबादी व औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले दूषित जल को गंगा में जाने से रोकने के लिए सभी बड़े नालों का रुख मोड़ने और नए नालों का निर्माण करने के साथ ही शहर के बड़ा चौराहा से दही चौकी तक सीवर लाइन बिछाई जाएगी। शुक्लागंज में गंगा नदी में गिरने वाले नालों को अपग्रेड करके उनका रुख मोड़ा जाएगा। इस पर 78 करोड़ रुपये खर्च किए जांएगे। वहीं उन्नाव शहर के नालों को अपग्रेड करने व ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर उनसे जोड़ने के पर 102 करोड़ रुपये और औद्योगिक क्षेत्र दही चौकी से शहर के बड़ा चौराहा तक भूमिगत सीवेज लाइन बिछाने के काम में 200 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गंगानदी में पानी छोड़ने से पहले उसे ट्रीटमेंट प्लांट में साफ किया जाएगा। इसके लिए 15 एमएलडी क्षमता के दो ट्रीटमेंट प्लांट बनेंगे।
इनसेट
केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के तुरंत बाद ही वित्तीय वर्ष 2015-16 में नवामि गंगे परियोजना के तहत एक्शन प्लान तैयार किया गया था। लेकिन बजट के अभाव में योजना पर दो साल बाद क्रियान्वयन शुरू नहीं हो पाया। हालांकि यूपी चुनाव में प्रचार के दौरान विरोधी दलों ने नवामि गंगे योजना पर सवाल खड़े किए हैं तो सरकार ने भी काम शुरू करने पर तेजी लाई है। उम्मीद है कि अगले एक दो महीने में काम तेजी से शुरू हो जाएगा।
क्या बोले जिम्मेदार
-डीएफओ वीके मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देश पर कार्ययोजना तैयार कर भेज दी गई है। जैसे ही बजट मिलेगा काम शुरू कर दिया जाएगा। उनका मानना है कि अगले कुछ ही दिनों में बजट जारी होने की उम्मीद है।
-जलनिगम निर्माण शाखा के एक्सईएन मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि एनजीटी से प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है। धनराशि जारी होते ही परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से गंगा नदी को प्रदूषण से निजात मिल जाएगी। कोई भी नाला या औद्योगिक क्षेत्र की ड्रेन का गंदा पानी बगैर ट्रीमेंट किए गंगा नदी में नहीं जाएगा।